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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१७९

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१७२ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह सहन नही होगा ।" में देख रहा था कि ये वाक्य बोलते हुए अहमद मुहम्मद काछलिया बड़े उत्तेजित होते जा रहे थे । उनका चेहरा सुखं हो गया था, गर्दन और माथेकी रणें खून के जोरसे दौरा करनेके कारण उभर आई थीं। शरीर काप रहा था। अपने दाहिने हाथ की उंगलिया गर्दनपर फेरते हुए वह गरज उठे -" में खुदाकी कसम खाकर कहता हू कि में कत्ल हो जाऊगा, पर इस कानून के सामने सिर न झुकाऊंगा और में चाहता हूं कि यह सभा भी यही निश्चय करें ।" यह कहकर वह बैठ गये। उन्होंने जब गर्दनपर उंगलिया फेरी तो मचपर बैठे हुए कुछ लोगों के चेहरोपर मुस्कराहट आगई । जहांतक मुझे याद है, मैंने भी उनका साथ दिया । सेठ काछ- लियाने अपने शब्दोमे जितना वल भरा था उतना वह अपने कामोमें दिखा सकेंगे, इस विषयमे मेरे मनमें थोड़ी शंका थी जब-जब मे इस शकाकी बात सोचता हू तब-तब और यहा इस बातका उल्लेख करते हुए भी मे लज्जित हो रहा हू । इस महान संग्राममे जिन बहुतोने अपनी प्रतिज्ञाका अक्षरशः पालन किया उनमे सेठ काछलिया सदा आगे रहे । उनका रंग बदलता हुआ मैने कभी देखा ही नही । 1 1 समाने तो इस भाषणका तालियोकी गडगडाहटसे स्वागत किया । उस वक्त में उनको जितना जानता था उसकी बनिस्बत और सभासद कही ज्यादा जानते थे, क्योंकि उनमेसे अधिकाशको तो इस गुदडीके लालका निजी परिचय था। वे जानते थे कि काछलियाको जो करना होता है वही कहते है ओर जो कहते है वही करते है। जोशीले भाषण और भी कई हुए। पर काछलिया सेठके भाषणको उल्लेखके लिए स कारण चुना है कि यह भाषण उनकी भावी कार्यावली की भविष्य- वाणी सिद्ध हुआ । जोशीले भाषण करनेवाले सभी नहीं टिक सके। इस पुरुषसिंहकी मृत्यु अपने देश-भाइयोंकी सेवा करते हुए