सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१९५

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

१५५ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह कारण नही रहता । गिरनेका तो रहता ही नहीं । अत में बहुत-से चीनी फिसल गये, क्योकि उनके नेता ने उन्हे दगा दिया । उसने खूनी कानूनके सामने घुटने तो नहीं टेके, पर एक दिन किसीने मुझे खबर दी कि वह विना हिसाव किताव दिये भाग गया। सरदारके चल देनेपर अनुयायियोका टिका रहना सदा ही कठिन होता है । फिर उसमे कोई मलिनता देखनेमें आये तब तो दूना नैराश्य उत्पन्न होता है। पर जब पकड़ - धकड़ शुरू हुई उस वक्त तो चीनियोंका जोरा खूब बढा हुआ था। उनमेसे गायद ही किसीने परवाना लिया हो। इससे जैसे भारतीय नेता गिरफ्तार किये गये वैसे ही चीनियोके कर्ता-धर्ता श्री क्विन भी पकड़े गये। कुछ दिनोतक तो कह सकते है कि उन्होने बहुत अच्छा काम किया। गिरफ्तार किये गये लोगो में जिस दूसरे नेताका परिचय यहा देना चाहता हू वह है थम्बी नायडू । थंबी नायडू तामिल थे । उनका जन्म मोरीशस में हुआ था। पर माँ-बाप मद्रास इलाकेसे आजीविकाके लिए वहा गये थे । थवी नायड सामान्य व्यापारी थे, स्कूलकी पढाई एक तरहसे कुछ भी न थी, पर अनुभव-ज्ञान ऊचे प्रकारका था । अग्रेजी बहुत अच्छी बोल -लिख सकते थे, यद्यपि भाषाशास्त्रको दृष्टिसे उसमे दोप दिखाई देते थे । तामिलका ज्ञान भी अनुभवसे ही प्राप्त किया था। हिंदुस्तानी भी अच्छी तरह समझ और बोल लेते थे । तेलगू भी काफी जानते थे, पर हिंदी या तेलगू लिपि बिलकुल नही जानते थे । मोरीशसकी भाषाका भी, जिसे श्रीओल कहते है और जो फ्रेचका अपभ्रश कही जा सकती है, थवी नायडूको बहुत अच्छा ज्ञान था । दक्षिणके भारतीयोमे इतनी भाषाओका कामचलाऊ ज्ञान होना अपवादरूप नहीं था । दक्षिण अफ्रीकामे सैकड़ो हिंदु- स्तानी मिलेगे जिन्हें इन सभी भाषायोका सामान्य ज्ञान