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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/१९७

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१२० दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह उनका क्रोध और साहसिकता (rashness) उनके प्रबल शत्रु सिद्ध हुए और उन्होने उनके गुणोको ढक दिया । कुछ भी हो, दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह सग्राम मे थवी नायडूका नाम सदा प्रथम वर्गमे रहेगा । हम सबको अदालतमें साथ ही हाजिर होना था पर सबके मुकदमे अलग-अलग चलाये गये । मजिस्ट्रेटने कुछ अभियुक्तोको ७ या १४ दिनके अंदर और बाकी सबको ४८ घटेके अदर ट्रांसवाल छोड़ देनेका हुक्म दिया। आज्ञा- की अवधि १९०८की १० वी जनवरीको पूरी होती थी। उसी दिन सजा सुनानेकेलिए हमें अदालतमे हाजिर होनेका हुक्म मिला । हममेसे किसी को कोई बचाव तो करना नही था । सबको यह स्वीकार करना था कि हमने कानूनके अनुसार परवाने नही लिये है और इस कारण मजिस्ट्रेटने जो हम निर्दिष्ट अवधिके भीतर ट्रासवाल छोड देनेका हुक्म दिया है उसका सविनय अनादर करनेका अपराध हमने किया है । मैने अदालतसे छोटा-सा बयान देनेकी इजाजत माँगी और वह मिल गई। मैने इस आशयका बयान दिया- "मेरे और मेरे बाद सुने जाने वाले मुकदमोमे भेद किया जाना चाहिए। मुझे अभी-अभी प्रिटोरियासे खबर मिली है कि वहाँ मेरे देश- वघयोको तीन महीनेकी कड़ी कैद की सजा मिली है और भारी जुर्माना भी किया गया है, जो अदा न किया गया तो तीन महीने की कडी कैद और भुगतनी होगी। इन लोगोने अगर अपराध किया है तो मैने और बड़ा अपराध किया है । अतः मजिस्ट्रेटसे मेरी प्रार्थना है कि वह मुझे वडी-से-वडी सजा दें।" पर मजिस्ट्रेटने मेरी प्रार्थना स्वीकार नहीं की और मुझे दो महीने की सादी कैदको सजा दी। जिस अदालत में में सकडो वार वकीलको हैसियत से खडा हुआ, वकील-मडली के साथ बैठता था उसमे आज मुलजिमके कटघरेमे खड़ा हू, यह