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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/२०६

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हो 1 पहला समझौता १६६ अदल-बदल करनेका अधिकार होना ही चाहिए। यह अतिम है, कहकर जनरल स्मट्सको पिस्तौल हमारे सामने नहीं कर देना चाहिए। खनी कानून रूपी पिस्तौल तो हमारे सामने घरा ही है, अब इस दूसरे पिस्तोलका असर हमारे ऊपर क्या सकता है ?" मि० कार्टराइट इस दलील के खिलाफ कुछ कह नही सके और सुमाया हुआ परिवर्तन जनरल स्मट्सके सामने रखना स्वीकार किया । मैने साथियोंसे मशविरा किया। उन्हें भी भाषा नही भाई, पर जनरल स्मट्स इस सुझाये सुधारके साथ मसविदेको मजूर कर ले तो समझौता कर लेना चाहिए, यह उन्हे भी पसंद आया । जो लोग बाहरसे आये थे उन्होंने मुझे नेतालोका यह सर्वसा दिया था कि मुनासिव समझौता होता हो तो उनकी मजूरीकी राह न देखकर में उसे कर लू। इस मसविदे पर मैंने मि० विजन और थवी नायडकी सही ली और तीनों के हस्ताक्षरके साथ मसविदा कार्टराइटके हवाले किया। दूसरे या तीसरे दिन १९०८ की ३० वी जनवरीको जोहान्सबर्ग के पुलिस सुपरिटेडेट मुझे जनरल स्मट्सके पास प्रिटोरिया ले गये । हममे वहुतसी बाते हुई। मि० कार्ट- । राइटके साथ उनकी जो वातचीत हुई थी वह उन्होने बताई। हिदुस्तानी कौम मेरे जेल जानेके बाद भी दृढ रही, इसके लिये भी उन्होंने मुझे मुवारकबाद दी और कहा - "मुझे आपके देशवासियोसे नफरत हो ही नही सकती। आप जानते ही है कि में भी बेरिस्टर हू। मेरे वक्तमें कुछ हिदुस्तानी विद्यार्थी भी मेरे साथ पढ रहे थे। मुझे तो अपने कर्तव्यका पालन भर कर देना है। गोरे यह कानून मागते हैं और आप स्वीकार करेंगे कि वे मुख्यत वोमर नही, बल्कि अंग्रेज है । आपका सुधार में स्वीकार करता हू । जनरल बोथाके साथ भी मैंने बातचीत कर ली है और में आपको विश्वास दिलाता हू कि आप लोगोंमेंसे अधिकाश परवाना ले लेंगे तो में एशिया-