२०४ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह घात करके भी बदल नहीं सकती। इस स्थितिको उत्पन्न करनेवाले हम है और उसे वदल भी हमही सकते है । जवतक सत्याग्रहका हथियार हमारे हाथ में है तबतक हम स्वतंत्र और निर्भय है । 1 "और अगर कोई मुमसे यह कहे कि कौममे जो बल आज आ गया है वह फिर आनेवाला नही तो में यह जवाब दूंगा कि यह कहनेवाला सत्याग्रही नहीं, वह सत्याग्रहको समझता ही नही। यह कहनेका अर्थ तो यह होता है कि आज जो वल प्रकट हुआ है वह सच्चा नहीं है, बल्कि नोके जैसा झूठा और क्षणिक है। यह बात सही हो तो हम विजयके अधिकारी नही। और जीत जाए तो जीती हुई चाजी भी हार जायगे मान लीजिये, सरकारने खूनी कानूनको रद कर दिया । पीछे हमने ऐच्छिक परवाने के लिये । इसके बाद सरकारने यही खूनी कानून फिर पास कर दिया और हमे परवाने लेनेको मजबूर करने लगे, तो उस वक्त उसे कौन इससे रोक सकता है ? और अगर इस वक्त अपने वलके विषयमे हमे शंका हो तो उस वक्त भी हमारी ऐसी ही दुर्दशा होगी । अत चाहे जिस दृष्टिसे हम इस समझौतेको देखे, हम यह कह सकते है कि उसे करने कौम कुछ खोयेगी नहीं, बल्कि कुछ नफेमे ही रहेंगी। और मैं तो यह भी मानता हू कि हमारे विरोधी भी हमारी नम्रता और न्याय बुद्धिको पहचान लेनेपर विरोध त्याग देने या उसे नरम कर देंगे ।" इस प्रकार जिन एक-दो आदमियोने उस छोटी-सो भडली मे विरोध प्रकट किया था उनके मनका में पूरा समाधान कर सका । पर आधी रातवाली बडी समामे जो वडर उठनेवाला था उसका तो मुझे स्वप्न में भी ख्याल नही था। मैने सभाको पूरा समझौता समझाया और कहा "इस समझौते से कोमकी जिम्मे- दारी बहुत बढ़ गई है। हमे यह दिखानेके लिए अपनी खुशीसे
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