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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/२२२

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समझौतेका विशेष : मुझपर हमला २१५ पर जोहान्सबर्गके गोरोने एटर्नी जनरलको इस तरहका कडा पत्र लिखा - " अपराधियोंको सजा मिलनेके बारेमे गाधीके विचार कुछ भी हो, वह इस देशमें नहीं चल सकते । उनपर जो मार पड़ी है उसके विषयमे वह भले ही कुछ न करे, पर अपराधियोने उन्हें धरके कोनेमें नही मारा, सरेआम बीच रास्तेमे मारा है । यह सार्वजनिक अपराध माना जायगा । कितने ही अग्रेज भी इस अपराधकी शहादत दे सकते है । अपराधियोंको पकड़ना ही होगा ।" इस आन्दोलनके कारण सरकारी वकीलने मीर आलम और उसके एक साथीको फिर गिरफ्तार कराया और उन्हें तीन-तीन महीनेकी कड़ी कैदकी सजा मिली। हा, में गवाहकी हैसियतसे तलब नही किया गया। अब हम फिर बीमारके कमरेकी ओर निगाह फेरे । मि० चमनी कागजात लेने गये, इतनेमें डाक्टर ध्वेट्स आ पहुचे । उन्होने मुझे देखा । मेरा ऊपरका होट फट गया था । उसके और गालके जख्ममे भी टांका लगाया । पसलियों आदिको देखकर उनमे लगानेके लिए दवा लिखी और जवतक टाका न खुले तवतक बोलनेको मना किया। खानेमे भी पतली चीजोंको छोडकर और कुछ खानेको मना किया । उन्होने यह निदान किया कि मुझे कही भी बहुत गहरी चोट नही माई है। हफ्ते के अंदर अपना मामूली काम-काज करने लायक हो जाऊगा । हो, एक-दो महीने इसका ध्यान रखना होगा कि शरीरपर अधिक श्रम न पडे । यह कहकर वह विदा हुए। यो मेरा बोलना वद हुआ, पर मेरा हाथ तो चल ही सकता था । मैने कोमके लिए अध्यक्षकी मारफत एक छोटा गुजराती संदेश लिखकर प्रकाशित करनेके लिए दे दिया। वह इस प्रकार है : है : "मेरी तबीयत अच्छी है। मिस्टर और 'मिसेज डोक