गोरे सहायक २२७ नही रहा जाता। इस बालिकाका नाम है मिस सोना ब्लेजीन । गोखलेको आदमियोको पहचाननेकी शक्ति अद्भुत थी । डेलागोमा बेसे जंजीवारतक हमे बाते करनेको सुदर और शांति-भरा अवसर मिल गया था । दक्षिण अफ्रीकाके हिंदु स्तानी और गोरे नेतानोका भी उन्हें अच्छा परिचय हो गया था। इन सभी मुख्य पात्रोके चरित्रका उन्होने सूक्ष्म विश्लेषण कर दिया और मुझे अच्छी तरह याद है कि मिस श्लेजीनको उन्होने भारतीय और गोरे सबमे प्रथम स्थान दिया था । "इसके जैसा निर्मल अत करण और काममे एकाग्रता, दृढता मैने बहुत ही थोड़े लोगोमे पाई है और भारतीयोके सग्राममे, किसी भी लाभकी आशाके विना इतना सर्वार्पण देखकर में तो दग रह गया। फिर इन सारे गुणोके साथ उसकी होशियारी और चुस्तीने तो तुम्हारी इस लड़ाई मे उसे एक अमूल्य सेविका बना दिया है। मेरे कहनेकी जरूरत तो नही, फिर भी कह देता हू कि उसको तुम अवश्य अपनाना ।" एक स्काच कुमारिका मेरे यहा शार्टहेड और टाइपका काम करती थी । उसकी वफादारी और नीतिमत्ता सीमा- रहित थी। इस जिंदगीमे मुझे कड़वे अनुभव तो बहुतेरे हुए है, पर सुदर चरित्र वाले इतने अधिक यूरोपियनो और भारतीयोस मेरा सम्पर्क हुआ है कि में इसको सदा अपना सौभाग्य ही मानता आया हूं। इस स्काच कुमारिका मिस हिक विवाहका अवसर आया तो मुझसे उसका वियोग हुआ। तब मि० केलनवेक मिस श्लेजीनको लाये और मुझसे कहा - "इस लढकीको इसकी माने मुझे सौपा है । यह चतुर है, ईमानदार है, पर इसमे नटखटपन और स्वतंत्रता बहुत अधिक है । शायद कुछ उद्धत भी कही जाय । तुमसे चल सके तो इसे रखो। में इसे तनख्वाहकी खातिर तुम्हारे पास नही रखता ।" मै तो अच्छे स्टेनो टाइपिस्टको
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