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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/२३९

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२३२ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह किया उस वक्त यह वीर महिला वोअर स्त्रियोमे अकेलो फिरती और उन्हें दृढ रहने को समझाती और वढावा देती। वह मानती थी कि वोअर युद्धके विषयमें अग्रेजोकी राजनीति सोलह आने अन्यायकी है। इसलिए स्व० स्टेडकी तरह वह उनकी हार मनाती और ईश्वरसे इसके लिए प्रार्थना करती । वोअरोकी इतनी बड़ी सेवा करनेके बाद जब उसे मालम हुआ कि जिस अन्यायके विरुद्ध बोमरोने तलवार उठाई थी वही अन्याय वह अज्ञानवश भारतीयो के साथ करनेको तैयार है तव उससे सहन न हो सका । बोअर जनता उसके प्रति बहुत सम्मान और प्रेम रखती थी । जनरल वोथाके साथ उसका अति निकटका सar था । उन्हीके यहां वह ठहरा करती थी। खूनी कानूनको रद करानेके लिए वोअर लोगोसे कहने मे उसने कुछ उठा नही रखा था। दूसरी बहन थी बॉलिक श्राइनर । इनके बारेमे मं पांचवें प्रकरणमे लिख चुका हूँ । ये दक्षिण अफ्रीका के प्रख्यात श्राइनर परिवारमे जन्मी हुई बिदुपी महिला थी । श्राइतर नाम इतना प्रसिद्ध है कि जब उनका व्याह हुआ तब उनके पतिको यही नाम ग्रहण करना पड़ा जिसमे थाइनर- परिवारके साथ उनका संबंध दक्षिण अफ्रीका गोरोमे लुप्त न हो जाय । यह उनका कुछ मिथ्या स्वाभिमान न था । में मानता हू कि उनके साथ मेरा अच्छा परिचय था । इस बहनकी सादगी और नम्रता भी वैसे ही उनका आभूषण श्री जैसे उनकी विद्वत्ता। उनके हवशी नौकरी और खुद उनके वीच कोई अंतर है, यह उन्होंने कभी नहीं माना। अंग्रेजी भाषा जहां-जहा वोली जाती है व्हा वहां उनको 'ट्रीम्स' नामक पुस्तक आदरके साथ पढी जाती है। यह है तो गद्य, पर काव्य- की पक्तिमे रखी जाती है। उन्होंने और भी बहुतगी बीज लिखी है। लेखनीपर इतना अधिकार होते हुए भी वह अपने