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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/२५०

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प्रस्तावना पाठक जानते है कि दक्षिण अफ्रीकाके सत्याग्रहका इतिहास उप- वासादि कारणोसे में जारी न रख सका था। उसे भव इस अक से फिर शुरू करता हूँ । मुझे उम्मीद है कि अब में उसे निर्विघ्न पूरा कर सकूंगा । इस इतिहासकी स्मृतियोपरसे में देखता हू कि हमारी मानकी स्थितिमे एक भी चीज ऐसी नहीं है जिसका अनुभव, छोटे पैमानेपर, दक्षिण अफ्रीका में मुझे न हुआ हो । प्रारभने यही उत्साह, यही एका, यही बाग्रह, मध्यमें यही नैराश्य, यही अरुचि, ग्रापसमे भगडा और द्वेपादि, ऐसा होते हुए भी मुट्ठीभर लोगोमे प्रविचन श्रद्धा, दृढता, त्याग, सहिष्णुता, वैसे ही अनेक प्रकारकी सोची-अनसोची कठिनाइया । हिंदुस्तानकी लड़ाईका प्रतिम काल अभी बाकी है। इस माखिरी मजिलकी में तो जो स्थिति दक्षिण अफ़्रीकामे अनुभव कर चुका हूँ उसकी ही माना यहा मी रखता हू । दक्षिण अफ्रीकाकी लढाईंका प्रतिम कान पाठक धमी मागे देखेगे । उसमे कैसे बिना मागी मदद हमारे पास चली आई, लोगोमे कैसे मनायास उत्साह उपजा श्रीर अलमे हिंदुस्तानी कोमकी सपूर्ण विजय किस प्रकार हुई, यह सब पाठक देखेंगे । 'यह इतिहास 'नवजीवन' में धारावाहिक रूपसे प्रकाशित हुआ था कानु