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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/२७८

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कौमपर नया सवाल उठानेका आरोप २७१ हूं कि सत्याग्रहका यह परिणाम अनिवार्य है। उसका कारण उसके मूल तत्त्वमे ही विद्यमान है। कारण कि सत्याग्रहमें कम-से-कम ही अधिक-से-अधिक है । कम-से-कममे कुछ घटाना तो हो ही नही सकता, इसलिए इससे पीछे हटा ही नही जा सकता और स्वाभाविक क्रिया वृद्धिकी ही हो सकती है। दूसरी लडाइया शुद्ध हों तो भी मागमे कमीकी गुंजाइश शुरूसे ही रखी जाती है। इससे वृद्धिका नियम उनपर निरपवाद- रूपसे घटित हो सकता है। इस दिपयमे मैने शका प्रकट की । पर जब कम-से-कम अधिक-से-अधिक ही हो तब बुद्धिका नियम कैसे घटित होता है, यह बात मुझे समझानी होगी। जैसे गंगा वृद्धिकी खोजमे अपनी गति छोड़ती नही, वैसे ही सत्या- ग्रही भी अपनी तलवारकी धार - सरीखा रास्ता नही छोडता । पर जैसे गगाकी धारा ज्योज्यो बढती जाती है त्यो त्यों दूसरी नदिया अपने आप आकर उसमे मिलती जाती है, वही बात सत्याग्रही गगाकी भी है । वस्तीका कानून सत्याग्रहके विषयमे शामिल कर लिया. गया तो यह देखकर सत्याग्रहका सिद्धात न जाननेवाले हिंदु- स्तानियोने आग्रह किया कि ट्रांसवालके भारतीय विरोधी सभी कानून उनमें ले लिये जाए दूसरे कितने लोगोंने कहा कि जबतक लड़ाई चल रही है, नेटाल, केप कालोनी, आरेंज फ्री स्टेट इन सबको निमंत्रित करके दक्षिण अफ्रीका के भारतीयोके विरोधी हरएक कानूनके विरुद्ध सत्याग्रह छेड दिया जाय। इन दोनो वातोमे सिद्धात भग था । मैने साफ बता दिया कि जो स्थिति सत्याग्रह आरंभ होनेके समय हमने नही ग्रहण की थी वह अब मौका देखकर ग्रहण कर लें तो यह ईमानदारी के खिलाफ होगा। हमारी शक्ति कितनी ही क्यो न हो, यह सत्याग्रह जिन मागोके लिए किया गया है उन मांगोके पूरी हो जानेपर वह समाप्त होना ही चाहिए। मेरा