इतिहास २१ करनी पडती है, फिर भी एक छोटी-सी नली से यकायक आवाज होती है, आग भडकती है और गोली लगकर क्षणभरमे आदमीका काम तमाम कर देती है ! यह ऐसा चमत्कार है जो बेचारे हबशीकी समझमे नही आ सकता। इससे वह इस चीजको काममे लानेवालेके दरसे हमेशा बदहवास रहता है। उसने और उसके बाप दादने देखा है कि इन गोलियोने कितने ही असहाय और निरपराध हवशियोंकी जान ले ली है। यह क्यों और कैसे होता है, बहुतेरे हवशी इसे आज भी नही जानते । इस जातिमे 'सभ्यता' धीरे-धीरे प्रविष्ट होती जा रही है। एक ओरसे मले पादरी ईसामसीहका संदेश, जैसा कुछ उन्होंने उसे समझा है, उनके पास पहुचा रहे है। उनके लिए मदरसे खोल रहे है और उन्हें सामान्य अक्षरज्ञान दे रहे है। इनकी कोशिश से कितने ही चरित्रवान हवशी भी तैयार हुए है; पर बहुतेरे जो अक्षरज्ञान और सभ्यतासे परिचित न होने के कारण अनेक अनीतियोंसे बचे हुए थे, आज ढोगी-पाखंडी भी हो रहे है। जो हवशी 'सभ्यता के सपर्कमे आ चुके है उनमे शायद ही कोई ऐसा हो जो शरावकी बुराईसे बचा हो। उनके तगड़े मस्त शरीरपर जब शराबका भूत सवार होता है तब ये पूरे पागल हो जाते है और न करनेके सब काम कर डालते है । सभ्यता के साथ-साथ आवश्यकतायोका बढना तो उतना ही पक्का है जितना दो और दो मिलकर चार होना । जरूरतें बढ़ाने के लिए हो या उन्हे श्रमका मूल्य सिखाने के लिए, हर हवशीको 'मुढ कर' या व्यक्ति-कर (Poll tax) और कुटी-कर (Hut tax) देना पड़ता है। ये करन लगाए जायें तो यह अपने खेतो मे रहनेवाली जाति खामोसे सोना या हीरा निकालने के लिए जमीन के अंदर सैकडो गजकी गहराईमे क्यों उतरने जाय ? और इन खानोके लिए इनका श्रम सुलभ न हो तो सोना और हीरे
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