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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/२८४

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सोराबजी शापुरजी प्रडाजनिया २७७ रक्खे और तदनुसार तैयारी भी । फिर अधिकारीका एक ही काम नहीं होता, बल्कि अनेक काम होते है जिनमें उसका ध्यान वट जाता है। इसके सिवा अधिकारीको अधि- कारका मद होता है जिससे वह बेफिक रहता है और मान लेता है कि कैसा ही आदोलन हो उसका उपाय कर लेना सत्ताषीश के बाएं हाथका खेल है । इसके विपरीत बांदोलन करनेवाला अपना ध्येय जानता हो, उसके साधनको जानता हो और अपनी योजनाके बारेमें उसका मन पक्का हो तो वह तो पूरी तरह तैयार होता है और उसे एक ही कामका विचार रात-दिन करना होता है । इसलिए अगर वह सही कदम पक्के तौरपर उठा सके तो वह सरकारसे सदा आगे ही रहता है। बहुतसे आदोलन जो बिफल हो जाते है उसका कारण सरकारकी अमामान्य शक्ति नहीं, बल्कि संचालकोंके ये ऊपर बताये हुए गुणोका अभाव होता है। साराग, सरकारकी गफलत के कारण या जान-बूझकर की हुई वैसी योजनाके कारण सोरावजी जोहान्सवर्गतक पहुच सके और उनके जैसे मामलेमे अधिकारीका क्या कर्तव्य है, इसकी कल्पना स्थानीय अधिकारीको न थी और न इस विपयमें बड़े अफसरका आदेश मिला था । सोराबजीके इस तरह आनेसे कौमके उत्साहमे बहुत वृद्धि हुई । कुछ नौजवानोको तो ऐसा जान पड़ा कि सरकार हार गई और जल्दी ही समझौता कर लेगी। वैसा कुछ नही था, यह उन्होंने तुरत ही देख लिया; बल्कि उन्होने यह भी देखा कि समझौता होनेके पहले शायद बहुतेरे युवकोको आत्मवलि देनी होगी । सोराबजीने अपने जोहान्सवर्ग आनेकी सूचना हांके पुलिस सुपरिटेडेटको दी और उसके साथ यह भी लिखा कि नई बस्तीके कानूनके अनुसार में अपने आपको ट्रांसवालमें रहनेका हकदार मानता हूं, इसलिए कि मुझे बग्रेजी भाषाका