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४ पुस्तकका अनुवाद मूल गुजरातीसे श्रीकालिकाप्रसादजीने किया है और भग्रेजो सस्करणके आधारपर बहुतसे परिवर्द्धन करके उसे यथा- समय पूर्ण बनानेका प्रयत्न किया गया है। -मन्त्री
४ पुस्तकका अनुवाद मूल गुजरातीसे श्रीकालिकाप्रसादजीने किया है और भग्रेजो सस्करणके आधारपर बहुतसे परिवर्द्धन करके उसे यथा- समय पूर्ण बनानेका प्रयत्न किया गया है। -मन्त्री