इतिहास २२ का काम बहुत अच्छा कर सकती है । मर्द कोई छोटा-मोटा रोजगार करते है । बहुतेरे तांगा-गाड़ी हाकनेका धंधा करके गुजर-बसर करते है। कुछने ऊचे दरजेकी अग्रेजी शिक्षा भी प्राप्त की है । उनमेंसे एक डाक्टर अब्दुलरहमान केप टाउनमें मशहूर है। वह केप टाउनकी पुरानी धारा सभामे भी पहुच गए थे। नए विधान प्रवान धारा सभामे जानेका यह हक छीन लिया गया है। वळदा लोगों का वर्णन करते हुए बीचमे मलायी लोगोका जिक्र अपने आप आ गया । पर अब हम जरा देखे कि वळदा लोग किस तरह बागे वढे । वलदाके मानी डच होते है, यह मुझे बतानेकी जरूरत नहीं होनी चाहिए । ये लोग जितने बहादुर योद्धा थे और है उतने ही कुगल किसान थे और आज भी है। उन्होने देखा कि हमारे आसपासका देश खेती के लिए बहुत ही उपयुक्त है। उन्होंने यह भी देखा कि इस देशके असल वाशिदे सालमें कुछ ही दिन काम करके आसानीसे अपना निर्वाह कर सकते है। तब उनसे मजदूरी क्यो न कराये ? वलदाके पास युद्धकला थी, बंदूक थी ओर दूसरे प्राणियोंकी तरह आदमियोको भी कैसे वसने किया जाता है, यह जानते थे । उनका विश्वास था कि ऐसा करनेमे धर्मकी कोई बाधा नही है । अत अपने कार्यके औचित्यके विपयमें तनिक भी शकाशील हुए बिना उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के मूलनिवासियोंकी मजदूरी के वलपर खेती आदि करना शुरू कर दिया । जैसे वलदा दुनियामे अपना फैलाव करनेके लिए अच्छी-अच्छी जमीने दूढ रहे थे वैसे ही अंग्रेज भी इस फेरमे फिर रहे थे । अत धीरे-धीरे अंग्रेज भी यहां पहुचे । अग्रेज और डच चचेरे भाई तो है ही। दोनोंका स्वभाव एक, लोभ एक । एक ही कुम्हारके बनाये हुए मटके जब इकट्ठे होते
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