३०० 1 दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह रकम वह बताता उसपर विश्वास रखकर उसीके अनुसार उसका खर्च दिया जाता। इसमे छल-कपटके लिए बहुत अवकाश था । कपटियोने इसका कुछ लाभ भी लिया। दूसरे सच्चे लोग भी, किसी खास ढंगसे रहनेके आदी होनेसे उसके योग्य सहायताकी आशा रखते थे । मैने देखा कि इस ढगसे लवे अरसेतक लडाई चलाना अशक्य है । लायकके साथ अन्याय होने और नाला- यकके अपने पास मे सफल हो जानेका डर रहता है। यह मुश्किल एक ही तरह हल हो सकती थी कि सारे कटवोको एक जगह रखे और सब साथ रहकर काम करे। इसमें किसीके साथ अन्याय होने का डर न रहता। ठगोके लिए बिलकुल गुजा- इश नही रहती, यह भी कह सकते है । जनताके पसेकी बचत होती और सत्याग्रही कटुवोको नये और सादे जीवनकी तथा बहुतोके साथ मिलकर रहनेकी शिक्षा मिलती, अनेक प्रातो और अनेक धर्मोके भारतीयोके साथ रहनेका मौका मिलता । पर ऐसी जगह कहा मिले ? शहरमे रहने जाय तो बकरी- को निकालते हुए कटेको घुसा लेनेका डर था। महीनेके खचके बरावर शायद मकान भाडा ही देना पडे और सत्याग्रही कुटुवोको शहरमे सादनीसे भी कठिनाई होती। फिर शहरमे इतना लवा - चौड़ा स्थान भी न मिल सकता जहा बहुतसे परिवार घर बैठे कोई उपयोगी धंधा कर सकें । अत यह स्पष्ट था कि हमे ऐसा स्थान पसद करना चाहिए जो शहरसे न बहुत दूर हो और न बहुत नजदीक / फिनिक्स तो था ही, 'इंडियन भोपीनियन वहा छपता था। थोडी खेती भी होती थी, बहुतसे सुभीते मौजूद थे । पर फिनिक्स जोहान्सबर्गसे ३०० मीलके फासलेपर और रेलसे तीस घटेका रास्ता था । इतनी दूर कुटुवोको छाना, ले जाना टेढा और महंगा काम था । फिर सत्याग्रही कुटुव अपना घर-बार छोडकर इतनी दूर जानेको तैयार नही हो सकते थे।
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