३२६ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह चले गये । लुटावनमे खूव तेज-शक्ति उत्साह आ गया और उसने हमसे विदा मांगी। स्टेशनमास्टरका बेटा, जो दो सालका रहा होगा, टाइफाइड ज्वरसे पीड़ित हुआ। उन्हें मेरे उपचारोका पता था ही। मुझसे सलाह ली। उस बच्चेको दो दिन तो मैने कुछ भी खानेको नहीं दिया। तीसरे दिनसे आधा केला, खूब मसला हुआ और उसमें एक चम्मच जैतूनका तेल और दो-चार बूंद नीबूका रस डालकर देने लगा। इसके सिवा और सब खुराक वंद रातमे उसके पेपर मिट्टीकी पट्टी वाघता । यह बच्चा भी चंगा हो गया। हो सकता है कि डाक्टरका निदान गलत रहा हो और उसका बुखार टाइफाइड (मियादी) न रहा हो । 1 ऐसे बहुतेरे प्रयोग मैने फार्ममे किये। उनमेसे एकमें भी विफल होनेकी बात मुझे याद नही है; पर आज वही उपचार करनेकी मेरी हिम्मत नहीं होती। टाइफाइडके रोगीको जैतूनका तेल और केला देते तो मुझे कपकपी होने लगेगी । १९१८ मे हिंदुस्तानमे मुझे आपकी बीमारी हुई और उसीका इलाज मेरे किये न हो सका और मुझे आजतक इसका पता नही कि जो उपचार दक्षिण अफ्रीकाम सफल होते ये वही उपचार हिंदुस्तानमें उसी अंशमं सफल नही होते इसका कारण मेरे आत्मविश्वासका घट जाना है या यहकि यहांकी जलवायु उन उपचारोके पूरी तरह अनुकूल नही ? मैं इतना जानता हू कि इन घरेलू इलाजो और टाल्स्टाय फार्ममें रखी गई सादी जिंदगीसे कौमके कुछ नहीं तो भी दो-तीन लाख रुपये बच गये। रहनेवालोमें कौटुबिक भावना उत्पन्न हुई | सत्याग्रहियोको शुद्ध are earn fear | बेईमानी और मक्कारीके लिए अवकाश न रहा, मूग और ककढ़ी अलग-अलग हो गई ।
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