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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/३३५

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३२८ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह सदा रहा है और में राजनैतिक काम-काजके झमेले- जिस हृदतक उलझ गया हूँ उससे छुटकारा पा सकूं तो इस उम्र में और शरीरके लिए जोखिम लेकर भी इसके आध्यात्मिक फलके परीक्षणके लिए फिरसे यह प्रयोग कर देख । डाक्टरों-वैद्योंमें आध्यात्मिक दृष्टिका अभाव होना भी हमारे मार्गमे विघ्नकारक हो गया है। पर अब इन मधुर और महत्त्वके सस्मरणोकी समाप्ति करनी होगी। ऐसे कठिन प्रयोग आत्मशुद्धिके सग्रामके अंदर ही किये जा सकते है । आखिरी लडाईके लिए टाल्स्टाय फार्म आध्यात्मिक शुद्धि और तपश्चर्याका स्थान सिद्ध हुआ । इसमें मुझे पूरा संदेह है कि ऐसा स्थान न मिला होता या प्राप्त किया गया होता तो आठ बरसतक हमारी लडाई चल सकी होती या नहीं, हमें अधिक पैसा मिल सका होता या नही और अतमे जो हजारो आदमी लडाईमे शामिल हुए वे शामिल होते या नहीं। टाल्स्टाय फार्मका ढोल पीटनेका नियम हमने नहीं रखा था। फिर भी जो वस्तु दयाकी पात्र नही थी उसने लोगोके दयाभाव, सहानुभूतिको जाग्रत किया। उन्होंने देखा कि हम खुद जो बात करने को तैयार नही है और जिसे कप्ट- रूप मानते हैं, फार्मवासी उस बातको कर रहे हैं। उनका यह विश्वास, १९१३ में जो फिरमे बडे पैमानेपर कटाई शुरू हुई, उसके लिए बडी पूजीरूप हो गया। इस पूजीके मुआवजेषा हिसाब नही हो सकता । ममावजा कब मिलता है, यह भी कोई नही कह सकता । पर मिलता है इस विपयमे मुझे तो तनिक भी गंका नहीं और मेरा कहना है कि किसीको भी शंका नही करनी चाहिए ।