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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/३५

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२५ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह गर्जना की। स्वर्गीय श्रीस्टेडने प्रकट रूपसे ईश्वरसे प्रार्थना की कि वह इस युद्धमे अग्रेजोको हरा दे और दूसरो को भी वैसा करनेकी प्रेरणा की । यह दृश्य अद्भुत था । सच्चा दु.ख सचाईके साथ सहा जाय तो वह पत्थरके दिलको भी पानी कर देता है। यह है इस कष्ट-सहन अर्थात् तपस्याकी महिमा और इसमे ही सत्याग्रहकी कूजी है । इसका फल यह हुआ कि फीनिखनकी सुलह हुई और दक्षिण अफ्रीकाके चारो राज्य एक शासन प्रबंधके नीचे आये । यद्यपि इस सुलहकी बात अखवार पढनेवाले हर हिंदुस्तानीको मालूम है, फिर भी एक-दो बाते ऐसी है जिनकी कल्पनातक बहुतोको होना मुमकिन नही। फ्रीनिखनकी सुलह होते ही दक्षिण अफ्रीकाके चारों राज्य एकमे मिल गये हो सो बात नही । हर एककी अपनी धारा सभा थी । उनका शासक मण्डल धारा सभाके सामने पूरे तौरपर जवाब देह न था । ट्रासबाल और फ्री स्टेटकी राज्य व्यवस्था 'काउन- कॉलोनी' - शाही उपनिवेश के ढगकी थी। ऐसे सकुचित अधि- कारसे जनरल बोथा या जनरल स्मट्सको सतोष न हो सकता था । फिर भी लार्ड मिलनरने बिना दूल्हेको बरात निकालना मुनासिब समझा। जनरल बोया और जनरल स्मट्स घारा सभासे अलग रहे। उन्होंने असहयोग किया । सरकारसे संबंध रखनेसे साफ इनकार कर दिया । लार्ड मिलनरने तोखा भाषण किया और कहा कि जनरल बोथाको यह मान लेनेकी जरूरत नही है कि यह सारा भार उन्ही के सिर है । राज्यव्यवस्था उनके बिना भी चल सकती है। बोअरोकी बहादुरी, उनकी स्वतंत्रता, उनकी कुरवानी के बारेमे मेने दिल खोलकर लिखा है। फिर भी पाठकोके मनपर यह छाप डालनेका मेरा इरादा नही था कि संकटकालमे भी उनमे मतभेद नही हो सकता, या उनमें कोई कमजोर दिल-