३४६ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह गोखलेने तो सोचा था कि तीन पीडका कर एक वरसके अंदर रद हो हो जायगा और उनके जानेके बाद यूनियन पालमेंटका जो अधिवेशन होगा उसमे उसे उठा देनेके कानून- का मसविदा पेश कर दिया जायगा । इसके बदले जनरल स्मट्सने यह प्रकट किया कि नेटालके यरोपियन यह कर उठा देनको तैयार नहीं है, इसलिए यूनियन सरकार उसे रद करनेका कानून पास करने में असमर्थ है। वस्तुत ऐसी कोई बात नही थी। यूनियन पार्लमेंटमे चारों उपनिवेशो के प्रति- निधि बैठते है । अकेले नेटालके सदस्योंकी उसमे कुछ नही चल सकती थी। फिर मंत्रिमंडलके पेश किये हुए बिलको पाल- मेट नामंजूर करे वहातक पहुंचाना जरूरी था । जनरद ★ स्मटलने इसमें से कुछ भी नही किया। इससे हमें इस क्रूर करको युद्ध कारणोंमे सम्मिलित कर लेनेका सयोग सहज ही मिल गया। इसके लिए हमे दो कारण मिले : एक तो यह कि चलती लढाईके दरमियान सरकारकी ओरसे कोई वचन दिया जाय और फिर उस वचनका भंग किया जाय तो यह वचन-भंग चलते सत्याग्रहके कार्यक्रममें दाखिल हो जाता है । दूसरा यह कि हिंदुस्तान के गोखले सरीखे प्रतिनिधिको दिया हुआ वजन तोड़ा जाय तो यह उनका ही नहीं, सारे हिंदुस्तानका अपमान है और यह अपमान सहन नहीं किया जा नकता ! केवल पहला ही कारण होता और सत्याग्रहियो शक्ति न होती तो उक्त करको रद करने के लिए सत्याग्रह करना बह छोड़ सकते थे । पर जब उससे हिदुस्तानका अपमान हो रहा हो तब तो उसे सहन कर लेना संभव ही नही था। इसलिए तीन पोडके करको युद्धके कार्यक्रममे शामिल कर लेना 1 सत्याग्रहियोको फर्मं जान पडा और जब तीन पोंडके करो युद्धक हेतमोमें स्थान मिल गया तब गिरमिटिया हिदुस्तानियो को भी सत्याग्रहमे सम्मिलित होने का मौका मिलगया। पाठको को
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