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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/३६४

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स्त्रियां खेल में ३५७ गिरफ्तार करानेके आदी हो जानेके बाद हिंदुस्तानी अकसर मजेके लिए पुलिसको तग करनेकी नीयत से भी उसको नाम नहीं बताते थे। अत इस जत्येके नाम न बतानेमें उसे कोई विचित्रता नही जान पड़ी। पुलिसने इस जत्येको गिरफ्तार किया। मुकदमा चला। सबको तीन-तीन महीनेकी कडी कंदकी सजा मिली । जो बहने ट्रासवालमे अपने आपको गिरफ्तार कराने- के प्रयत्नमे निराश हुई थी वे नेटालकी सरहृदमें दाखिल हुईं। पुलिसने उन्हे बिना परवानेके प्रवेश करनेके जुर्ममें गिरफ्तार नही किया। यह तै हुआ था कि पुलिस उन्हे न पकडे तो वे न्यू- कैसेल जाकर पढाव करे और कोयलेकी खानोके हिदुस्तानी मजदूरोसे अपना काम छोड देनेकी विनती करे । न्यूकैसेल नेटालमे कोयलेकी खानोंका केन्द्र है । इन खानोंमें मुख्यत. हिंदुस्तानी मजदूर ही काम करते थे। बहनोने अपना काम शुरू किया। उसका असर बिजलीकी तरह फैल गया। तीन पौटके करकी कहानी उन्होने सुनी तो उनपर गहरा असर हुआ। उन्होने अपना काम छोड दिया। मुझे तार मिला । गहुवा, पर इतना ही घबराया भी। मुझे क्या करना है ? इस अद्भुत जागरण के लिए में तैयार नही था। मेरे पास पैसा नही था; न इतने आदमी थे जो इस कामको संभाल लें। अपना फर्ज में समझता था। मुझे न्यूकैसेल जाना और जो कुछ हो सके वह करना था । में उठा और चल दिया । सरकार अब इन वहादुर त्रनोको क्यो छोडने लगी ? ये गिरफ्तार हुई। उन्हें भी वही सजा मिली जो फिनिक्स- वाले जत्थेको मिली थी- तीन तीन महीनेकी कड़ी कैद और उसी जेलमे रखी गई । दक्षिण अफ्रीकाके भारतीय अव जागे । उनको नीद टूटी। उनमें नई चेतना आई जान पड़ी। पर बहनोके