૨૭૪ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह पर इसी अगांतिके बीच मोरावाई सरीखी भक्त हाथमें जहरका प्याला लेकर हँसते हुए मुहको लगाती है । अपनी अंधेरी कोठरीमे बैठा हुआ सुकरात अपने हाथमें जहरका प्याला थामे अपने मित्रको गूढज्ञानका उपदेश करता है और कहता है - जो गाति चाहता हो वह उसे अपने अतरमें तलाग करे । इसी शांतिके वीच सत्याग्रहियोका दस्ता पढाव डालकर, सवेरे क्या होगा इसकी चिता न करते हुए पढा था । मैने सरकारको चिट्ठी लिखी थी कि हम ट्रांसवालमें बसने- के इरादेसे प्रवेश करना नही चाहते । हमारा प्रवेश सरकारके वचनभगके विरुद्ध अमली फरियाद है बोर हमारे आत्म- सम्मान के भंगसे होनेवाले दःखका शुद्ध निदर्शन है । हमें तो 4 सरकार यही चाल्र्सटाउनमें गिरफ्तार कर ले तो हम निश्चित हो जाय । वह ऐसा न करे और हममेंसे कोई छिपकर ट्रांसवाल- में दाखिल हो जाय तो हम उसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। हमारी लड़ाई में गुप्त कुछ है ही नही। व्यक्तिगत स्वार्थ किसीको साधना नहीं है। किसीका छिपकर प्रवेश करना हमें पसंद नही होगा, पर जहां हजारों अनजान आदमियोंसे काम लेना हो और जहां प्रेमके सिवा दूसरा कोई वचन न हो वहा किसीके कामके लिए हम जिम्मेदार नही हो सकते । फिर सरकार यह भी जान ले कि अगर उसने तीन पौंडका कर उठा दिया तो गिरमिटिए कामपर लौट जायेंगे और हड़ताल बंद हो जायगी। अपने दूसरे कष्ट दूर करनेके लिए हम उन्हें सत्याग्रहमे शामिल नही करेंगे अतः स्थिति ऐसी अनिश्चित थी कि सरकार कब गिर- फ्तार करेगी यह कहा नही जा सकता था। पर ऐसी स्थिति में सरकारके जबाव की राहू अधिक दिन नही देखी जा सकती थी । एक-दो डाककी हो राह देखी जा सकती थी। इसलिए हमने
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