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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/३८२

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ट्रांसवाल में प्रवेश-१ ३७५ निश्चय किया कि सरकार हमें गिरफ्तार न करे तो तुरंत चार्ल्स- टाउन छोड़ दें और ट्रांसवालमे दाखिल हो जायें। रास्तेमें पुलिस न पकड़े तो काफिला रोज आठ दिनतक २० से २४ मोल- तक कूच करता जाय। हमारा इरादा आठ दिनमें टाल्स्टाय फार्म पहुंचने का था । इसने सोचा था कि जबतक लड़ाई खतम नही होती तबतक सब वही रहें और फार्ममे काम करके आजीविका पद्रा करें। मि० केलनवेकने सारा प्रबंध कर रखा था। काफिले- के रहनेके लिए कच्चे घर बनवाने और यह काम उससे ही लेनेकी बात सोची गई थी। इस बीच छोटे-छोटे खेमे खड़े करके वढे, कमजोर उनमे रखे जायें और सवल गरीरवाले खुले मैदानमे पड़े रहे। इसमें कठिनाई यही थी कि वरसातका मौसम आ रहा था और इस मौसममे सवल- निर्वल सबको कोई आश्रय चाहिए ही । पर मि० केलनवेक इस कठिनाईका उपाय कर लेनेकी हिम्मत रखते थे। काफिलेने कचकी दूसरी तैयारियां भी कर ली। चाल्सं- टाउनके भले अग्रेज डाक्टर विस्को (जिलेके हेलय अफसर ने हमारे लिए दवाइयोंका एक छोटा-सा वक्स तैयार कर दिया और अपने कुछ औजार भी दिये, बिन्हे मुझ-सा अनाडी आदमी भी इस्तेमाल कर सकता था। यह वक्स हमे खुद लादकर ले जाना था, क्योकि काफिले के साथ कोई भी सवारी नही रखनी थी। इससे पाठक समझ सकते है कि इस बक्समे कम-से- कम दबाएं रही होगी। वे इतनी भी नही थी कि एक वक्तमे सो आदमियोंके लिए काफी हो सके। इतनी कम दवाएं साथ ' रखनेका खास कारण तो यह था कि हमे रोज किसी-न-किसी गावके पास पडाव करना था। इसलिए जो दवा चुकती, वह मिल सकती थी और हमे अपने साथ एक भी रोगी या अपन आदमी को नही रखना था । उन्हें तो रास्तेमें ही छोड देनेका निश्चय किया गया था।