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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/३८६

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ट्रांसवालमें प्रवेश-२ ३७९ मैं यहां आया हूं एक यूरोपियन ऐसा भी है जो आपको बता देना चाहता है कि आपने हिंदुस्तानियोंपर जो इलजाम लगाये है वे गलत हैं। आप जो सोचते है वह हिंदुस्तानी नहीं चाहते । उन्हें न आपका राज्य चाहिए, न वे आपसे लड़ना चाहते हैं । उनकी मांग तो बुद्ध न्यायकी है। जो लोग ट्रांसवालम दाखिल होना चाहते हैं वे वहीं वसनके लिए नहीं जाना चाहते। उनपर अन्यायकारी कर लगाया गया है उसके खिलाफ अमली फरियाद करनेके लिए उन्हें दाखिल होना है। वे बहादुर है। वे लडाई-झगड़ा नही करेंगे। आपसे लड़ेंगे नही; पर आपकी गोलियां लाकर भी ट्रांसवालमें दाखिल तो होगेही। वे आपकी गोलियों या मालोंसे डरकर पीछे कदम हटानेवाले नहीं। उन्हें स्वयं कष्ट सहनकर आपका दिल पिघलाना है। वह पिघलेगा ही। इतना ही कहनेके लिए मैं यहां आया हूं। यह कहकर मैने तो आपकी सेवा ही की है। आप घेते, अन्यायसे बचें ।" इतना कहकर मि० केचनवेक अपनी जगहपर बैठ गये । लोग कुछ लज्जित हुए । लस्नेको ललकारनेवाला पहलवान तो उनका दोस्त हो गया. । पर इस सभाकी हमे खबर थी, इसलिए बोक्सरस्टके गोरोकी ओरसे कोई उपद्रव हो तो हम उसके लिए तैयार थे। सरहदपर जो इतनी बड़ी पुलिस इकट्ठी कर रखी गई थी उसका अर्थ यह भी हो सकता है कि गोरोको मर्यादाका उल्लंघन न करनेसे रोका जाय । जो हो, हमारा बस वहांसे शांतिपूर्वक गुजर गया। किसी गोरेके कोई शरारत करनेकी याद मुझे नही है । सब यह नया कौतक देखनेको निकल पड़े। उनसे कितनोंकी आखोंमें मित्रताकी झलक भी थी । हमारा मुकाम पहले दिन बोक्सरस्टसे कोई आठ मीलपर पडनेवाला पामफोर्ड नामका स्टेशन था और हम शामके ५-६ बजेतक वहां पहुंच गये । लोगोंने रोटी और शक्करका