३८० दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह आहार किया और मदानमें लेट गये । कोई भजन गाता था, कोई वातें करता था । कुछ स्त्रियां रास्तेमें थक गईं। अपने बच्चोको गोदमे लेकर चलनेकी हिम्मत तो उन्होंने की थी। पर और आगे जाना उनकी शक्तिके बाहर था । इसलिए अपनी चेतावनी के अनुसार मैने उन्हें एक भले हिंदुस्तानी की दुकानमें छोड़ दिया और कह दिया कि हम टाल्स्टाय फार्म पहुंच जाएं तो उनको वहा भेज दें । हम गिरफ्तार कर लिये जाएं तो उनको घर भेज दें। उस व्यापारी भाईने यह प्रार्थना स्वीकार कर ली । 4 ज्यों-ज्यो अधिक रात होती गई त्यों-त्यों सब शोरगुल गांत होता गया। मैं भी सोनकी तैयारीमे था। इतनेमे खड- खडाहट सुनी। मैने एक यूरोपियनको लालटेन लिए आते देखा । मैं समझ गया । सुझे कोई तैयारी तो करनी ही नही थी । पुलिस अफसरने मुझसे कहा - " आपके लिए मेरे पास बारट है। मुझे आपको गिरफ्तार करना है ।" मैने पूछा - "कब ?" जवाव मिला" अभी ।" "मुझे कहां ले जाइयेंगा ?" "अभी तो पासके स्टेशन पर और जब ट्रेन आयेगी तब वोक्सरस्ट ले जाऊगा ।" मैने कहा - "तो में किसीको जगाये बिना तुम्हारे साथ चलता हूं, पर अपने साथीको कुछ हिदायते दे दू "शौकसे दीजिए ।" मैंने वगलमें सोये हुए पी० के० नायडूको जगाया। उनसे अपनी गिरफ्तारीकी खबर देकर कहा कि काफिलेबालोको सवेरा होनेके पहले न जाना और सवेरा होनेपर नियमानुसार कूच कर देना । कूच तो सूर्योदयसे पहले ही करनी थी। जहां विश्राम करने और रोटी वाटनेका समय आये वहा लोगोको
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