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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/४००

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तो सीधे पूछते । कसोटी १६३ नाम भेजे जाते। उन्हें एक दिन भी ब्योरेवार तार न मिळता इन तारोंका प्रचार वह अपनी रोगशय्यासे दिनों वह सख्त बीमार थे। पर दक्षिण दशामें भी खुद देखनेका आग्रह रलते थे रात देखते, न दिन । फल यह हुआ कि सारा हिंदुस्तान भडक उठा और दक्षिण अफ्रीकाका सवाल वहां प्रधान प्रश्न बन गया । करते, क्योंकि इन अफ्रीकाका काम इस और इस काममे न यही वक्त था जब लार्ड हार्डिजने मद्रासमे (दिसंबर १९१३) वह प्रसिद्ध भाषण दिया जिसने दक्षिण अफ्रीका और विलायतम खलबली मचा दी। वाइसराय दूसरें उपनिवेशो या साम्राज्यके अगभूत देशोंकी आलोचना नही कर सकता। पर लाई हाडिजने यूनियन सरकारकी कड़ी टीका ही नही की, सत्याग्रहियोके कामका पूरा बचाव भी किया, यहांतक कि सविनय कानून भंग- का भी समर्थन किया । विलायतमें उनके साहसकी कुछ कडवी आलोचना अवश्य हुई, फिर भी उन्होने अपने कार्यपर पश्चात्ताप न कर उसका औचित्य प्रकट किया। उनकी इस दृढताका असर बहुत अच्छा हुआ । इन अपनी खानोमे कैद दुखी और हिम्मतवाले मजदूरों- को छोडकर हम क्षणभर खानोके बाहरकी स्थितिपर निगाह डाले | खाने नेटालके उत्तरी भागमे अवस्थित थी, पर हिंदुस्तानी मजदूरोंकी वडी-से-बडी तादाद नेटालके नैऋत्य गोर वायव्य कोणोमे थी वायव्य कोणमें फिनिक्स, वेरू- कम, टोंगाट इत्यादि स्थान पढते है, नैऋत्यमे इसीपिंगो और अमजिन्टो इत्यादि । वायव्य कोणके मजदूरोंके साथ मेरा खास परिचय था उनमे से बहुतेरे बोअर युद्धमे भी मेरे साथ रह चुके थे । नैऋत्य दिशाके मजदूरोंके साथ मेरा इतना नजदीकका सावका नही पड़ा था। उस ओर