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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/४०२

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कसौटी ३६५ दूर काम छोडकर निकल पड़े थे। वे किसी उपायसे कामपर वापस नही जाते थे। जनरल ल्यूकिन अपने सिपाहियों के साथ यहा मौजूद थे और हडतालियोपर गोली चलानेका हुक्म देने को तैयार थे । स्वर्गीय पारसी रुस्तमजीका छोटा लड़का वहादुर सोरावजी जो उस वक्त मुस्किलसे १८ वरसका रहा होगा, उनसे यहां पहुच गया था। जनरलके घोड़ेकी लगाम थामकर वह बोल उठा, “आप फेर करनेका हुक्म नहीं दे सकते। मैं अपने आदमियोको शांतिसे कामपर लौटा देनेकी जिम्मेदारी लेता हूं।" जनरल ल्यू किन इस नौजवानकी वहादुरीपर मुग्ध हो गये और उसे अपना प्रेम-वल माजमा लेने- की मुहलत दे दी । सोरावजीने लोगोको समझाया । वे समझ गये और अपने कामपर लौट गये । इसतरह एक नवयुवक- की मोकेकी सूम, निर्भयता और प्रेमसे खूनखराबी होते होते बची । पाठकोंको जान लेना चाहिए कि ये गोलियोंकी बौछार आदि काम गैरकानूनी ही माने जा सकते है । खानोके मजदूरो- के साथ व्यवहार करनेमे सरकारकी कार्रवाईकी जाहिरा शक्ल वाकायदा थी। वे हड़ताल करनेके लिए नही, बल्कि ट्रासबालकी सरहदमे बिना परवानोके प्रवेश करनेके जुर्ममे गिरफ्तार किये गये थे । नैऋत्य और वायव्य कोणोमे हड़ताल करना ही अगर अपराध मान लिया गया था तो वह किसी कानूनके रूसे नही; बल्कि अधिकारके वलसे । अतमे तो शक्ति ही कानून बन जाती है । अगरेजीमें एक कहावत है जिसके माने यह है कि बादशाह कभी कोई गलती करता ही नही हुकूमतका सुभीता ही आखिरी कानून है । यह दोष सार्वभौम है। सच पूछिये तो इस तरह कानूनको भूल जाना सदा दोप ही नहीं होता। कुछ 'वी किंग केन ह नो रोग । हू