अंतका प्रारंभ ४०१
- चलानेके लिए कोई मसाला नही था । इसलिए उन्हें भी
छोड़ना पड़ा । ये घटनाएं एंड्रज और पियर्सनके पहुंचने के पहले ही हो चुकी थीं। इसलिए इन दोनों मित्रोंको मेने ही डर्बन जाकर जहाजसे उतारा । उन दोनोको इन घटनाओंको कुछ भी खबर नही थी। इसलिए सुनकर उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ । इन दोनों मित्रोके साथ मेरी यह पहली ही मुलाकात थी । छोडे जानेसे हम तीनोंको मायूसी ही हुई। बाहरकी हमें कुछ भी खबर नही थी । कमीशनकी खबरसे हमें अचरज हुआ। पर हमने देखा कि हम कमीशनकी कोई सहायता करनेमें असमर्थ है । इतना जरूर समझा कि उसमें हिंदुस्ता- नियोकी ओरसे कोई एक आदमी तो होना ही चाहिए । इसपर हम तीनो हवन पहुंचे और वहासे जनरल स्मट्सको इस आशयका पत्र लिखा : "हम कमीशनका स्वागत करते हैं। पर उसके दो सदस्यो, मि० एसेलेन और मि० वाइलीकी नियुक्ति जिस रीतिसे हुई है उसपर हमें सख्त एतराज है। उनके व्यक्तित्वसे हमारा कुछ भी विरोध नही। वे प्रसिद्ध और सुयोग्य नागरिक है। पर दोनों अनेक वार भारतीयोको नापसंद करने का भाव प्रकट कर चुके है । इसलिए उनसे बिना जाने अन्याय हो जाना संभव है। मनुष्य अपना स्वभाव यकायक बदल नही सकता। ये दोनो सज्जन अपना स्वभाव बदल लेंगे यह मानना प्रकृतिके नियमके विरुद्ध है । फिर भी हमारी माग यह नही है कि वे कमीशनसे अलग कर दिये जाएं। हमारा सुझाव इतना ही है कि एक-दो तटस्थ पुरुष उसमे वढा दिये जाएं और इसके लिए हम सर जेम्स रोज़ इनिस मोर ऑन- रेवल डब्ल्यू०पी० बाइनरके नाम पेश करते है। दोनों नामी व्यक्ति अपनी न्यायवृत्तिके लिए सुविख्यात है। हमारी २६