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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/४१४

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प्राथमिक समझौता f ४०७ भी उस वक्त उन्होंने समझौते की बातचीत करनेसे इन्कार कर दिया था । इस वक्त वह मुझसे मशविरा करनेको तैयार थे। भारतीय जनताकी मांग तो यह थी कि कमीशनमें हिंदुस्तानियोका कोई प्रतिनिधि होना चाहिए। पर इस बातपुर जनरल स्मट्स अटल थे। उन्होंने कहा- "यह वृद्धि किसी तरह नहीं हो सकती। उसमें सरकारकी प्रतिष्ठा घटेगी और में जो सुधार करना चाहता हूं उन्हें नहीं कर सकूगा । आपको मालूम होना चाहिए कि मि० एसेलेन हमारे आदमी है। सुधार करनेके बारेमें वह सरकार के खिलाफ नही जायेगे; बल्कि उसके अनुकूल ही रहेंगे। कलंक बाइलो नेटालके प्रतिष्ठित पुरुष है और आप लोगोंके विरोधी भी माने जा सकते हैं। अतः वह भी तीन पौंडका कर उठा देने में सहमत हो जाएं तो हमारा काम आसान हो जायगा । हमारे अपने झगडे-भट इतने है कि हमें क्षणभरको फुरसत नहीं है। अतः हम चाहते हैं कि आपका सवाल ठिकाने लग जाय । आप जो मांगते है उसे देनेका हमने निश्चय कर लिया है; पर कमीशनकी सम्मतिके विना वह दिया नही जा सकता । आपकी स्थिति भी में समझ सकता हूं। आपने कसम खा ली है कि जबतक हम आपकी ओरसे किसीको कमीशनमें नही ले ले तबतक आप उसके सामने शहादत न देगे। आप शहादत भले ही पेश न करे; पर जो लोग देने आयें उन्हें रोकनेका आदोलन न करे और सत्याग्रहको मुलतवी रखें। में मानता हूं कि इससे आपका लाभ ही होगा और मुझे शांति मिलेगी। आप लोग हड़तालियोंपर जुल्म होनेकी बात कहते है । इस बातको आप सावित नही कर सकेंगे क्योकि आप शहादत नही दे रहे है। इस बारेमे आपको खुद सोच-विचार लेना है ।" इस प्रकारके भाव जनरल स्मट्सने प्रकट किये। मुझे वो ये सारे भाव कुल मिलाकर अनुकूल मालूम हुए। सिपाहियों