४१२ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह यह कैसे दुःखकी बात है ? यह आदमी फिर धोखा देगा और आप फिर सत्याग्रह करने की बात कहेंगे । उस वक्त कौन आपका विश्वास करेगा ? लोग बार-बार जेल जायें और वार वार धोखा खायें, यह कैसे हो सकता है ? जनरल स्मट्स जैसे आदमी- के साथ तो एक ही समझोता हो सकता है जो मांगना वह ले लेना। उनसे वचन नहीं लेने चाहिए। जो वादा करके मुकर जाय उसे उधार कोई कैसे दे सकता है ?" मैं जानता ही था कि इस तरहकी दलीलें कितनी ही जगह पेश की जायेंगी इससे मुझे अचरज नहीं हुआ । सन्या- ग्रही कितनी ही बार धोखा क्यो न खाये जवतक वचनपर विश्वास न करनेका स्पष्ट कारण नही हो तबतक विपक्षीके वचनका विश्वास करेगा ही । जिसने दु.खको सुख मान लिया हो वह जहां अविश्वास करनेका कारण नहो वहां केवल दुःखके नामसे डरकर अविश्वास नही करेगा, बल्कि अपनी शक्तिपर भरोसा रखकर विपक्षके विश्वासघातकी ओरसे निश्चित रहकर कितनी ही बार विश्वासघात क्यों न किया जाय फिर भी विश्वास करता ही जायगा और यह मानेगा कि ऐसा करनेसे सत्यका वल बढेगा और विजय निकट आयेगी । अत जगह-जगह सभाएं करके में अंतमें लोगोंको समझौता स्वीकार करानेके लिए समझा सका और वे भी सत्याग्रहका रहस्य अव अधिक समझने लगे। इस वक्त के समझतिमें मि० ऐंड्रज मध्यस्थ और साक्षी थे। वैसे ही वाइसरायके राजदुतके रूपमें सर बेंजामिन रावर्टसन भी थे। इसलिए इस समझौते के मिथ्या होनेका डर कम-से-कम था । मैने हठकरके समझौता करनेसे इन्कार कर दिया होता तो यह उलटा कोमका दोष समझा जाता और जो विजय छ महीने बाद हमें मिली उसकी प्राप्तिमे अनेक प्रकारके विघ्न बाते । सत्याग्रही किसी भी कालमें इसका कारण नहीं प्रस्तुत करता कि कोई उसकी ओर उगलीतक
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