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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/४२१

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૪૪ दक्षिण चीकाका सत्याग्रह

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युद्धका अंत कमीशन की रिपोर्ट निकलने के थोड़े ही दिन बाद जिस कानूनके जरिये समझौता होने वाला था उसका मसविदा यूनियन गजटमे प्रकाशित हुआ । इस मसविदेके प्रकाशित होते ही मुझे केप टाउन जाना पड़ा। यूनियनकी विधान सभा ( यूनियन पार्लमेंट) की बैठके वही हो रही थी, अब भी वही होती है । इस बिलमें ९ धाराएं हैं और पूरा बिल 'नवजीवन' के दो कालमोमे आजायगा । उसका एक भाग भारतीयोंके बीच हुए व्याहके विषयमें है, जिसका आशय यह है कि जो व्याह हिंदुस्तानमें वैध माना जाता है वह दक्षिण अफ्रीका भी जायज समझा जायगा; पर एक ही वक्तमें किसीके एकसे अधिक पत्नियां हों तो उनमेंसे एक ही दक्षिण अफ्रीका में कानूनन जायज पत्नी मानी जायगी। दूसरे भागके द्वारा उस तीन पौडके करको रद करना है जो हरएक गिरमिटिएको, अगर वह स्वतंत्र भारतीयके रूपमे दक्षिण अफ्रीकामे रहना चाहता हो तो हर साल देना पड़ता था। तीसरे भाग में जिन लोगोंको afri अफ्रीका रहने प्रमाणपत्र मिले हुए थे उन प्रमाण- पत्रोंका महत्व बताया गया है। यानी यह बताया गया है कि जिसके पास यह प्रमाणपत्र हो उसका दक्षिण अफ्रीकामे रहनेका हक किस दरजेतक साबित होता है । इस विलपर यूनियन पार्लमेंटमें खासी और मीठी बहस हुई। दूसरी बातोका, जिनके लिए कानूनकी जरूरत नही थी, स्पष्टीकरण जनरल स्मट्सके और मेरे बीच हुए पत्रव्यवहारमे किया गया । उसमें इन विषयोका खुलासा किया गया था । पढ़े-लिखे भारतीयो के केप कालोनीमे प्रवेशके अधिकारकी रक्षा,