उपसंहार E हिंदुस्तानी कौम कुछ शांति भोगते हुए रह सकेगी और सरकारके लिए हैरानीका कारण नहीं होगा । उपसंहार इस प्रकार आठ बरसके बाद सत्याग्रहका यह महान संग्राम समाप्त हुआ और ऐसा जान पड़ा कि सारे दक्षिण अफ्रीका में बसनेवाले भारतीयोंको शांति मिली। में खेद और हर्ष दोनोंके साथ इंगलेण्डमे गोखलेसे मिलकर हिंदुस्तान जानेके लिए दक्षिण अफ्रीकासे रवाना हुआ। जिस देशमें में पूरे २१ बरस रहा, अगणित कड़वे-मीठे अनुभव प्राप्त किये, जिस देशमें में अपने जीवनके कार्य, उद्देश्यके दर्शन कर सका उस देशको छोड़ने- में मुझे बहुत दुःख हवा और में जिन्न हुआ। हर्ष यह सोचकर हुआ कि इतने बरसोंके बाद हिंदुस्तान वापस आकर मुझे गोखले- की मातहती और रहनुमाई में सेवा करनेका सौभाग्य प्राप्त होगा । इस युद्धका जो ऐसा सुंदर अंत हुआ उसके साथ दक्षिण अफ्रीकाके भारतीयोंकी आजकी स्थितिकी तुलना करते हुए क्षणभरके लिए दिलमें यह सवाल उठता है कि भारतीयाने इतने सारे दुःख किस लिए उठाये ? अथवा सत्याग्रहके शस्त्रकी श्रेष्ठता ही कहां सिद्ध हुई ? इसके उत्तरपर यहां विचार कर लेना चाहिए। सृष्टिका एक नियम है कि जो वस्तु जिस साधन- से मिलती है उसकी रक्षा उस साधनसे ही होती है । वर्षात् दंडसे मिली हुई वस्तुकी रक्षा दंड ही कर सकता है -- प्राप्त वस्तुका सग्रह सत्यके द्वारा ही हो सकता है । इसलिए दक्षिण अफ्रीकाके भारतीय आज भी सत्याग्रहके हथियारसे काम ले सकें तो अपने आपको सुरक्षित बना सकते हैं। सत्या-
पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/४२४
दिखावट