भारतीयोने क्या किया ? -१ ५.५. गिरमिटियोको गोरे 'कुली' कहकर ही पुकारते है । कुली के मानी है वोझ ढोनेवाला । यह नाम इतना चल गया है कि गिरमिटिया खुद भी अपने आपको 'कुली' कहते नही हिचकता । पीछे तो यह नाम भारतीयमात्रको मिल गया । सैकड़ों गोरे हिदुस्तानी वकील और हिंदुस्तानी व्यापारीको क्रमशः 'कली वकील' और 'कुली व्यापारी' कहा करते । इस विशेषणके व्यवहारमे कोई दोष है, इसे कितने ही गोरे तो मानते या जानते भी नहीं; पर बहुतेरे तो तिरस्कार प्रकट करनेके लिए ही 'कली' शब्दका उपयोग करते । इससे स्वतंत्र भारतीय अपने आपको गिरमिटियोसे भिन्न वतानेका यत्न करते हैं। इस तथा जिन्हें हम हिंदुस्तान से ही साथ ले जाते हे उन कारणोंसे भी स्वतंत्र भारतीय वर्ग और गिर मिटिया तथा गिरमिटमुक्त वर्गके बीच दक्षिण अफ्रीकामे भेद किया जा रहा था । इस दुःखके दरियाके सामने बांध बननेका काम स्वतंत्र हिदुस्तानी व्यापारियों और खास तौरसे मूसलनान व्यापारियोने अपने ऊपर लिया । पर गिरमिटियो या गिरमिटमुक्त हिंदु- स्तानियोको साथ लेनेकी कोशिश इरादेके साथ नही की गई। यह बात उस वक्त शायद सूभी भी नहीं । सूझती भी तो उन्हें साथ लेनेसे काम विगढ़नेका ही डर होता। दूसरे मुख्य आपत्ति तो स्वतंत्र व्यापारी वर्गपर ही है, यह सोचा गया। इसलिए बचावके प्रयत्न ने ऐसा संकुचित रूप धारण किया। इन स्वतंत्र व्यापारियोमे अंग्रेजीके ज्ञानका अभाव था। हिंदु- स्तानमे उन्हे सार्वजनिक कामोका अनुभव नही हुआ था, पर इन कठिनाइयोके होते हुए भी कह सकते है कि उन्होने मुसी- बतका सामना डटकर किया। उन्होंने यूरोपियन वकोलोकी मदद ली, अर्जियां तैयार कराई, जब-तब शिष्ट-मण्डल भी ले गए और जहा जहा वन पड़ा और सूझा वहा वहा अन्यायसे
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