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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/७९

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७२ दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह देखता है । हमसे जानबूझकर हिंदुस्तानमे नेटालका चित्र मेने कुछ हलका ही वीची था । पर नेटालमें तो मेरा लेख बहुत थोडे गोरे पटते और उसकी परवाह करनेवाले और भी कम होते। हिंदुस्तानमं कही हुई बातके विषयमें इसका उल्टा ही होता और हुआ। रायटर ग्लासों को तो हजारो गोरे पढते थे । फिर जो बात नामे लिखने लायक की गई हो उनका महत्व जितना वास्तवमें हो उससे अधिक नमा जाता है। नेटाळके गोरे जितना सोचते थे उतना अमर हिंदुस्तानमें किए हुए मेरे कामका पडा होता तो गिरमिटकी प्रथा शायद वद हो जाती और इससे सैकड़ों गोरे मालिकोका नुक्रमान होता। इसके सिवा यह भी समझा जा सकता है कि नेटालके गोरोकी हिदुस्तान में बदनामी हुई । इस प्रकार नेटालके गोरोका पारा गरम हो रहा था कि इतनेमे उन्होंने सुना कि मे बाल-बच्चोके साथ 'कोलैंड' जहाजमे लोट रहा हूँ । उस जहाजमें ३-४ सो हिंदुस्तानी यात्री है । उसीके माथ 'नादरी' नामका दूसरा स्टीमर भी उतने ही मुसाफिर लेकर आ रहा है। इससे वलती आगमे घी पड़ा और वह बड़े जोरसे भड़क उठी । नेटालके गोरोंने बडी-बडी सभाए की और लगभग सभी प्रमुख यूरोपियन उनमे शामिल हुए। खासतौर से मेरी और आमतोरसे हिंदु- स्तानी कोमकी कड़ी आलोचना की गई। 'कोलैंड' और 'नारी' के आगमनको 'नेटालपर चढ़ाई' का रूप दिया गया । सभामे बोलनेवालोने यह अर्थ निकाला कि से इन ८०० यात्रि- योंको साथ ले आया हू और नेटालको स्वतंत्र भारतीयोसे भर देनेके प्रयत्नमें यह मेरा पहला कदम है। सभामें एक- मत से यह प्रस्ताव पास हुआ कि दोनो स्टीमरोके मुमा फिरोको और मुझे जहाजसे उतरने न दिया जाय। नेटालकी सरकार उन्हें न रोके या न रोक सके तो अपनी जो कमेटी बनाई गई है