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पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/९२

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भारतीमने क्या किया ? -२ ८५ यह राजनैतिक विषय हुआ। मुझे भी इसी मैदानमें आपसे लड़ना और आपको और दूसरे गोरोको यह दिखाना है कि भारतीय राष्ट्र ब्रिटिश साम्राज्यके एक बडे भागके रूपमें, गोरोको नुकसान पहुचाए बिना, केवल अपने सम्मान और अधिकारकी रक्षा करना चाहता है ।" मि० एस्कंव बोलले" आपने जो कुछ कहा वह मैने समझ लिया और वह मुझे पसंद भी आया । आपसे यह सुननेकी में आशा नही रखता था कि आप मुकदमा चलाना नही चाहते, और आप मुकदमा चलाना चाहते तो में जरा भी नाखुश न होता; पर जब आपने फरियाद न करनेका विचार प्रकट कर दिया है तब मुझे यह कहनेमे हिचक नही कि आपने उचित । निश्चय किया है। इतना ही नहीं, अपने इस सयमसे आप arrat aant विशेष सेवा करेगे। साथ ही मुझे यह भी कबूल करना चाहिए कि अपने इस निश्वयसे आप नेटाल सरकारको fare स्थितिसे बचा लेगे। आप चाहे तो हम धर-पकड़ वगैरह करेंगे, पर आपको यह बतानेकी जरूरत नही है कि यह सब करनेसे गोरोका कोष फिर उमड़ेगा, अनेक प्रकारकी टीकाएं होंगी और ये बातें किसी भी सरकारको नही रुच सकती । पर अगर आपने अंतिम निश्चय कर लिया हो तो आप अपना विचार जतानेवाली एक चिट्ठी मुझको लिख दे । हमारी बातचीतका खुलासा मेजकर ही हम मि० चेंबरलेनके सामने - अपनी सरकारका बचाव नहीं कर सकते ! मुझे तो आपके पत्रके भावार्थका ही तार करना होगा। पर में यह नही कहता कि यह चिट्ठी आप मुझे अभी लिखकर ढेदे । अपने मित्रोके साथ आप मशविरा करले । मि० लॉटनकी भी सलाह लेले । इसके बाद भी अगर आप अपनी रायपर कायम रहे तो मुझे लिखे। पर इतना मुझे कह देना चाहिए कि अपनी चिट्ठीमे फरियाद न करनेकी जिम्मेदारी आपको साफ तौरपर अपने