सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Dakshin Afrika Ke Satyagraha (Hindi).pdf/९७

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

६० दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह सकेंगे, उन्होने यह भी सोच रखा था कि जोहान्सवर्गको आवादीका बहुत वडा भाग तो हमारा स्वागत ही करेगा । पर इस भले डाक्टरका यह हिसाब भी गलत रहा। राष्ट्रपति क्रूगरको सारी योजनाकी खबर वक्तसे मिल गई थी। उन्होने अतिशय शांति और कुशलता के साथ गुप्त रीतिसे डाक्टर जेमिसनका सामना करनेकी तैयारी कर ली और साथ-साथ जो लोग साजिशमे उनके साथी थे उन्हें गिरफ्तार कर लेनेकी तैयारी भी कर रखी । अत. डाक्टर जेमिसन जोहान्सबर्ग के पास पहुच पाए इसके पहले ही वोअर सेनाने गोलियोंकी वोछारसे उनका स्वागत किया । इस सेनाके सामने डाक्टर जेमिसनका जत्था टिक नही सकता था । जोहान्सबर्ग मे कोई बगावत न कर सके, इसका भी पूरा प्रवध कर लिया गया था। इससे वहा किसीने सिर उठानेका साहस नही किया । राष्ट्रपति क्रूगरकी सरगर्मी से जोहान्सबर्गके करोडपति अवाक रह गये। इतनी बढिया तैयारी कर रखनेका अति सुंदर फल यह हुआ कि इस सकटका सामना करनेमे सरकारका कम-से-कम पैसा खर्च हुआ और जानका नुकसान भी कम-से-कम हुआ । । डा० जेमिसन और उनके दोस्त सोनेकी खानोंके मालिक पकड़े गए। उनपुर तुरत मुकदमा चलाया गया । कितनोंको फांसीको सजा हुई। इनमें अधिकांश तो करोडपति हो थे । बड़ी मरकार इसमे क्या कर सकती थी ? दिन-दहाडेका हमला था । राष्ट्रपति क्रूगरका महत्व एकबारगी बढ गया । उप- Trवेश सचिव मि० वेबरलेनने दीनवचन -युक्त तार भेजा और राष्ट्रपति क्रूरके दयाभावको जगाकर उन बड़े आदमियो के लिए दयाकी भीख मागी । राष्ट्रपति क्रूगर अपना दाब अच्छी तरह खेलना जानते थे । दक्षिण अफ्रीकामे कोई शक्ति उनकी राजशक्ति छीन सकती है, इसका डर उन्हें था ही नही ।