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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१०१

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लाहुरेले प्रदेय । कपिलेनोरित है. जिससे देवहिनको पहुँचा हो ! रस कान वापस विज्ञात रहा हो. ते लक्की नाजानी है की मनिहार सुन्ने उपर दूसरोंको देठा दें। नगर अपने हायने देना ग्रेजी काम नसे. हि चित्रे आपको पान हे । अनाजका इण्ट्रोल कल अनावल बारे भने अरने से विचार बाहिर किये थे, सुन्न कि घर हुने न्हाने हा कि मुझे पका दिसाम हैं अगर मेरे उपर अमल किया जायगा, हो २४ इटे अन्दर अनाकी ती काफी हद जानकार लोग मेरे far दूर हो बाक्लो । मिल विषय साम क्षारसे सहमत है या नहीं यह अलग बात है । वजीरोंको चेतावनी मेरे पास भाकर कबी लोगोंने यह कहा कि जनता मन्त्री पुराने मैनेज अनलदारो की तरह ही बननाने उगले काम करते हैं। भिस पर प्रकाश डालनेवाले कुछ कागजात भी वे लोग मेरे पास छोड गये हैं। किस सिलसिले मैंनेत्रियोंसे बातचीत नहीं की। नगर सि नामले नेरी चाक राय है कि जिन बातोंके लिये हम सप्रेम सरकारी आलोचना करते रहे हैं, सुनमेसे कोसी भी बात जिन्नेदार सत्रियोंकी हुकूमत में नहीं होनी चाहिये । अग्रेजी हुकूलनके दिनोनें बाभिसराय, कानून बनाने और सुपर अमल करानेके लिये ऑर्डिनेन्स निकाल सकते ये । तत्र जुरेशिभल और भेक्सीक्युवेिव्ह ( न्याय और शासन ) के काम क्षेत्र हो शख्स पाल रत्ननेका काफी विरोध किया गया था । तबसे अब तक अली कोभी बात नहीं हुनी जिससे जिस विषयमे रा बदलनेरी जररत हो । देशमें ऑर्डिनेन्सका शासन बिलकुल नहीं होना चाहिये । कानून बनानेका अधिकार सिर्फ आपकी धारा तमाओंको रहे । वजीरोंको, जब जनता चाहे, तब सुनके पद हटाया जा सकता न च क्रम अधिकार आपकी अदालत रहे । सुन्हें