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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१०२

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भरसक कोशिश करनी पंचायतराज ' का सुझाव जिन्साफको सस्ता, सरल और चेदाग बनानेकी चाहिये। जिस मक्सदको पूरा करनेके लिये रखा गया है । हाथी कोर्टके लिये यह मुमकिन नहीं कि वह लाखों लोगोंके झगडे निपटा सके। सिर्फ गैरमामूली हालतोंमें ही आकस्मिक कानून बनानेकी जरुरत पड़ती है। कानून बनाने में कुछ ज्यादा देर भले लगे, मगर अक्जीक्यूटिव्हको लेजिस्लेटिव्ह असेम्बलीपर हावी न होने दिया जाय । जिस वक्त कोभी खुदाहरण तो मुझे याद नहीं है, भगर अलग अलग सूचोंसे मेरे पास जो खत आये हैं, झुनके ही आधारपर मैंने ये बातें कही हैं। मिसलिओ जब मे जनतासे अपील करता हूँ कि वह अपने हाथमे कानून न ले, तभी जनता के मंत्रियोसे भी अपील करता हूँ कि जिन पुराने तरीकोंकी सुन्होंने निन्दा की है, सुन्हीको खुद अपनानेके खिलाफ वे सावधानी लें। रामराजका रहस्य जनतासे में अक बार फिर अपील करूँगा कि वह अपनी सरकारके प्रति बच्ची व वफादार बने और या तो खुसकी ताकत बढाये या झुसे अपनी जनहते अलग करदे, जिसका कि से पूरा पूरा अधिकार है । जवाहरलालजी सच्चे अवाहर हैं। वे कभी हिन्दू राज कायम करनेकी बातना समर्थन नहीं कर सकते और न सरदार ही, जिन्होंने मुसलमानोंकी हिफाजत की है, अंसा कर सकते हैं। जो भी मे अपने आपको भेक सनातनी हिन्दू कहता हूँ, फिर भी मुझे जिस यातका अभिमान है कि दक्खिनी अफ्रीका के स्वर्गीय भिमाम साहब मेरे साथ हिन्दुस्तान भागे थे और साबरमती आश्रममे सुनकी मृत्यु हुआ श्री । झुनकी लढकी और दामाद अभी भी साबरमतीमें है । क्या मै या सरदार तुन्हें निकाल दें ? मेरा हिन्दू धर्म मुझे सिखाता है कि मै सब की भिज्जत करूँ । यही रामराजका रहस्य है । अगर लोगोंको जवाहरलालजी, सरदार पटेल व सुनके साथियोंपर श्रद्धा और विश्वास न रहे, तो वे मुन्हें बदल सस्ते हैं, लेकिन लोग सुनसे यह अम्मीद नहीं कर सकते, और तुन्हें करनी भी नही चाहिये कि वे अपनी आत्माके खिलाफ हिन्दुस्तानको सिर्फ हिन्दुओं का ही सुक्क मान लें। जिससे तो घरवादी ही होगी । २०६५