२७ मोगे बजाय कम्पन दीजिये गायक 1 यात्रामा भने भिटाि 1 जब मैं समागे आ गा था, क लिये मुझे फोन earera नानाशान् । पहादुरोंकी अहिमा भी मिलने से भ 1 रहे थे । रेजिम ि 1 और मिस भग था । पर antear हुआ । पताओं । म सधै लापर कुछ कि यह मुसलमान है । विना भारतर जमुना फेंक दिया गया । सुन भरनी बना हुआ था, जो पता भ था। शुम आदमी के पुरा भले आपने शुभ ht faया । aaa गी व मुसलमान दे न सके और कुम्होंने अपना या कि आपने अपनी aaa aaa भाभीको पचानेst fra क्यों न की अगर आप अमा करते ता मुमकिन था हि गुम मुसलमान भाभी जान बन जाती. आपले आपकी जान चली जाती । यह बहादुरकी अहिंमा होती । यह भी सम्भा था कि आपकी बहादुरीका असर दूसरे मुमाफिरोंपर पहता और विरोध करनेमें वे भी आपका साथ देते । सुन भरे दोस्तने मजूर किया कि यह बात सुनके दिमागमें शुम वक्त नहीं आभी, अगरचे सुने आना चाहिये था । E
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