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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१०५

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फौज और पुलिसका फर्ज जिस तरह प्रेस किसी राजा मजबूत अग होता है, खुसी रह फौज और पुलिस भी है । वे किसीकी तरफदारी नहीं कर सकतीं । साम्प्रदायिक आधारपर फौज और पुलिसका बटवारा बहुत बुरी चीजें है । लेकिन अगर फौन और पुलिम साम्प्रदायिक विचारकी बन जाती हैं, तो सुसन नवीना वरवादी हो होगा। हिन्दुस्तानी संघकी फोन और पुलिसका बहफ़ है कि वे जान देकर भी अल्पमतवालोंकी हिफाजत करें। वे अपने जिस पहले फ़र्जको भेरु पलके लिये भी भुला नहीं सकतीं । यही बात में पाकिस्तानकी फोन और पुलिलके बारेमें भी कहूँगा, जिन्हें बहाँके अल्पमतवालोंकी रक्षा करनी ही चाहिये । पाकिस्तानकी फौज और पुलिस मेरी बात मानें या न मानें, लेकिन में यूनियनकी फौज और पुलिससे वही काम करा सकूँ, तो मुझे पक्का विश्वास है कि पाकिस्तानको भी सा करना पडेगा । लिम वाल्ने सारी दुनियापर प्रभाव डाला है कि हिन्दुस्तानने बिना जुन बहाये आजादी पाभी है। फोन और पुलिसको अपने सही भरतावसे झुस आजारीके लायक बनना होगा। जिसके अलावा, आजाद हिन्दुस्तानमे दोनोंको श्रीमानदारीसे अपना फर्ज अदा करना चाहिये । जब तक हर नागरिक सरकारी तरफ अपना फर्ज अदा नहीं करता, तब तक कोमी भाजाद सरकार शासन चला हो नहीं सकती। मैं यहाँ उन्हें अहिंसक बनानेकी बात नहीं कर रहा हूँ। मैं तो सिर्फ यही कहता है कि वे हँसाको मानें या न मानें, लेकिन अपना बरताव ठीक रखें । अगर इन्होंने मेरी यातपर ध्यान नहीं दिया, तो बादमे सुन्हें पछताना व्होगा |