सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१०९

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

का है कि असल बीमारीसे जितने लोग नहीं मरते, सुससे कहीं ज्यादा मुसके डरसे नर जाते हैं । मैं चाहता हूँ कि आप अलके सारा डर छोड़ दें। लेकिन शर्त यही है कि भाप अपनी जरूरतें लुट पूरी करनेका कुदरती कदम मुठाये। मुझे पक्का विश्वास है कि तुराक परते कण्ट्रोल झुठा लेनेते देशमें अकाल नहीं पड़ेगा और लोग भुखमरीके शिकार नहीं होंगे। झुसी तरह हिन्दुस्तानमें रूपदेकी लगी होने का भी को कारण नहीं है। हिन्दुस्तान अपनी जररतले ज्यादा क्यास पैदा करता है । लोगोंको खुद काटना और चुनना चाहिये। सिलिये में तो बाहता हूँ कि कपडे कण्ट्रोल भी झुठा दिया जाय । हो सकता है कि मिले कपकी कीमत वह जाय। मुझसे यह कहा गया है और मेरा विश्वाम है कि अगर लोग कनते कम छह महीने तक कपड़ा न खरीदें, तो स्वभावत पकी कीमत पर जायगी। और मैंने यह सुझाया है कि मिसी बीच जरुरत पड़नेपर लोगोको अपनी खावी तैयार करनी चाहिये । जिल्ल मौकेपर मे अपने मिस विश्वासपर अमल करने की बात नहीं कहता कि यादीके भिस्तेमाल में दूसरे किसी कपटेन भिस्तेमाल शामिल नहीं है। अक बार लोग अपनी खुराक और कपड़ा खुद पैदा करने लगे कि सुन सारा दृष्टिकोण ही घटल जायगा। आज हमें सिर्फ सियासी भाजाकी मिली है। मेरी सलाहपर अमल करनेसे भाप माती भाजाये मी हासिल करेंगे और सुसे गाँवोंत अक ओक आदनी महसूस करेगा। तब लोगोंके पास आपने गनेका समय या अिच्छा नहीं रह जायगी। जिसका नतीजा यह होगा कि शराब, जुआ वगैरा जैसी दूसरी बुरामियों भी छूट जायेंगी। तब हिन्दुस्तान के लोग आजारीके हर मानीनें आबाद हो जायेंगे। भगवान भी सुनकी मदद करेना क्योंकि वह सुन्होंकी मदद करता है, जो खुद अपनी मदद करते हैं । ક્