प्रेरणाले लोग धर्म बदलें, तो असके खिलाफ मुझे कुछ नहीं कहना है । अपनी मिच्छासे हरिजन बन जानेके कारण मै हरिजनोंके मनको जानता हूँ। आज भेक भी हरिजन अमा नहीं है, वो मिस्लाममें शामिल किया जा सके । मिस्लामके बारेमें वे क्या जानते हैं । न वे यही समझते हैं कि से हिन्दू क्यों हैं। हर धर्मके माननेवालोंपर यही बात लागू होती है । आज वे जो कुछ भी है, वह भितीलिये हैं कि वे किसी खास धर्ममें पैदा हुये हैं। अगर वे अपना धर्म बदलेंगे, तो सिर्फ मजबूर होकर, या अस लालच में पड़कर, जो मुन्हें धर्म बदलनेके लिये दिखाया जायगा । आजके वातावरणमे लोग खुद होकर धर्म बदलें, तो भी से सच्चा या कानूनी नहीं मानना चाहिये । धर्मको जीवनले भी ज्यादा प्यारा और ज्यादा कीमती समझना चाहिये। जो भिस सबाभीपर अमल करते हैं वे खुस आदनीके बनिस्बत ज्यादा अच्छे हिन्दू हैं, जो हिन्दू धर्म- शास्त्रोंस जानकार तो है, लेकिन जिसका धर्म के समय टिका नहीं रहता । दशहरा और बकर श्रीद जिसके बाद गाधीजीने दशहरा और बकर अवके पास भा रहे त्योहारा जिक्र किया और हिन्दुओं व मुसलमानोंसे अपील की कि वे ज्यादासे ज्यादा सावधान रहें और मिस मौकेपर अरु दूसरे की भावनाओं को देस न पहुँचायें । में चाहता हूँ कि अिन त्योहारोंके मौकेपर दोनों पार्टियों साम्प्रदायिक दंगोंको जन्न देनेवाले कारणोंसे बचें । दक्षिण अफ्रीकाका सत्याग्रह आन्तिर में गाधीजीने दक्षिण अकलसे शुरु किये जानेवाले मलाहमा जिक्र करते हुये कहा, वहाँ सत्यामह कुछ समय तक पहले चला था । वीच वह योडे दिनोंके लिये बन्द कर दिया गया था 1 हिन्दुस्तानका मानला सयुक्त राष्ट्रसंनके सामने है और दक्षिण अफ्रीका हिन्दुओं और नरमानाने स्वसे फिर सत्याग्रह शुरू करनेमा फैसला किया है । मेरी सुन लोगोंको यह सलाह है कि वे हिन्दुस्तानी संघ और पाकिस्तान कारोकी मदद न । दोनों सरकारोंका यह फर्ज ८४
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