३३ ओक अच्छी मिसाल १४-१०-४७ अपना भाषण शुरू करते हुये गाधीजीने लोगोंसे कहा कि आज मेरे पास और ज्यादा कम्बल आ गये हैं । आर्य समाज गर्ल्स स्कूलकी दो अध्यापिकायें और कुछ विद्यार्थिनें कुछ रुपये और कम्बल मेरे पास लामी थी। नगर जिन भेंटोंसे ज्यादा खुशी मुझे अध्यापिकाकी भित रिपोर्टले हुआ कि अनाजके कण्ट्रोलके बारेमें अपील निकालकर मैंने जो सलाह दी है कि चाहरसे अनाजका आयात बन्द करनेपर हमारे यहाँ खाद्य पदार्थों में जो कमी आये, झुसे पूरा करनेके लिये हमें महीनेमे हो बार सुपवास करना चाहिये, असे पढ़कर स्कूलकी अध्यापिकाओं और लडकियोंने हर गुरुवारको झुपवास रखनेका निश्चय किया है । न्होंने यह भी तय किया है कि वे अपने बगीचे जो कुछ अनाज पैदा हो सकेगा, पैदा करने की कोशिश करेंगी। अगर सभी मिस्र तरह काम करें, तो अनाजकी तगीका सवाल बहुत थोडे समयमें हल हो जाय । r बादमे अरानके राजदूत (चार्ज-डी-अफेअर्स) और झुनकी पत्नी मुझसे मिलने आये थे । वे बहुतसे कम्बल भेंट करनेके लिये लाये, जिन्हें मैने आभार मानते हुये ले लिया । सिक्ख दोस्तों से बातचीत । आम दिनमें बहुतसे सिक्ख दोस्त मुझसे मिले। वे दो टोलियोंमें क्षेकके बाद क्षेत्र मेरे पान आये । मेरी झुनसे लम्बी चर्चाओं हुआ, जिनका मार यह था कि हम आपस आपसमें लड़कर कोभी भी अद्देश्य पूरा नहीं कर सकते ! जो कुछ कार्रवासी करना सम्भव हो, झुसे हमें अपनी अपनी सरकारोंके जरिये करना चाहिये ।
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