भेक किताब है, जिसका नाम है 'सुनहले कामोंकी किताब ' ( व चुक ऑफ गोल्डन सीड्स ) | आपको मैली कुछ चीजें अपने पास रखनी चाहिये । भला काम करनेवालेपर किसीको शक नहीं करना चाहिये । जिन दो मुसलमान दोस्तोंने तो मुझे अपने नाम नहीं बताये । कहा जाता है कि हरनेक मुसलमान सिक्खोंको अपना दुश्मन समझता है और हरओक तिक्त मुसलमानोंको अपना दुश्मन मानता है । यह सच है कि कभी मुसलमान जिन्सानियत जो बैठे हैं, नगर कभी हिन्दुओं और सिक्खोंकी भी यही हालत है। लेकिन व्यक्तियोंके क्योंके लिये पूरी जातिको दोष देना ठीक नहीं है, फिर वे व्यक्ति कितनी ही ज्यादा तादादने क्यों न हों। कभी हिन्दुओं और सिक्खोंने कहा कि मुसलमान दोस्तोंकी वजहसे सुनी जानें बची है और कभी मुसलमानोंने भी मिट्टी तरही बातें कही है । जैसे भले हिन्दू सिक्ख, और मुसलमान हर सूबे में मिल नाते हैं। मैं चाहता हूँ कि अलवारवाले असी खबरोंको छापे और झुन सुरे कामोंका जिक्र चलें, जो बदलेकी भावनाको भाते हैं । बेशक, अच्छे और ख़ुदार कामोंको वढाचार नहीं लिखना चाहिये । हिन्दी या हिन्दुस्तानी १ 2 1 मैंने अलवारों पढ़ा कि आगेसे चू० पी० की सरकारी भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी । जिससे मुझे बुरा हुआ 1 हिन्दुस्तानी सपने सारे मुसलमानोंनेसे अक बौयाभी बू० पी० में रहते हैं। सर सेजबहादुर सप्रू जैसे कभी हिन्दू हैं, जो झुके विद्वान है । क्या सुनको मुर्दू लिपि भूल जानी होगी ? सुचित बात यह है कि दोनों लिपियों रखी जायें और बारे चरकारी काममै सुनमेंसे कितीन भी सुपयोग करनेकी मन्जूरी दी जाय। जिसका नतीजा यह होगा कि लोग लाजमी तौरपर दोनों लिपियों सीखेंगे। तब भाषा अपनी परवाह आप कर लेगी और हिन्दुस्तानी सुकेकी भाषा वन जायगी। जिन दो लिपियोंकी जानकारी फिजूल नही जायगी । तले आप और आपकी भाषारी तरक्की होगी । और जैसा कदन झुठानेपर को डीका नहीं करेगा ९२
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