३७ कुरुक्षेत्रके लिये कम्बल भेजे गये १८-१०-१४७ देते हुने प्रार्थनाके बाद भाषण में गाधीजीने कहा, यह सवर मुझे मिले है । मुझे खुशी होती है कि और ज्यादा कम्बल और पैसे मुझे आशा है कि अगर जिस रफ्तारसे कम्बल मिलते रहे, तो सारे वतरतवाले भरणार्थियोंको कम्बल देनेम कोभी कठिनाभी नहीं होगी । तुझे यह जानकर भी खुशी हुआ कि सरदार पटेलने भिसी तरहकी मेक अपील निकाली है। डॉ० नुशीला नय्यर, जो शरणार्थियोकी दवादारुका भिन्तजाम करती हैं, आज सुबह श्रीमती मथामी, श्रीमती सरन और श्रीमती कृष्णादेवीके साथ कुरक्षेत्रके लिये खाना हो गभी हैं । वह अपने साथ चारणार्थियों को देनेके लिये बहुत से कम्बल और कपड़े ले गभी है। राष्ट्रभाषा मैने हिन्दुस्तानीको राष्ट्रभाषाके रूपमें अपनानेके लिये जो विचार बताये थे, सके सम्बन्धमे मेरे पास कभी खत आते रहते है । मुझे जिसमें जरा भी शक नहीं कि हिन्दुस्तानी सारे हिन्दुस्तानियोंके अन्तर- प्रान्तीय व्यवहारके लिये सबसे अच्छी भाषा होगी। आम लोग न तो फारसीसे लदी झुर्द समझ सकते हैं और न सस्कृतसे भरी हिन्दी । ब्रिटिश एनके खतम हो जानेपर अप्रेजी अदालतोंकी भाषा या आपसके व्यवहारका सामान्य माध्यम नहीं रह सकती । अग्रेजीने हमारी राष्ट्रभाषाकी जगह बरवस छीन ली थी, लेकिन अब से जाना होगा । मै अग्रेजीकी मुसकी अपनी जगहम भिज्जत करता हूँ । लेकिन वह हिन्दुस्तानकी राष्ट्रभाषा नही वन सकती । मेक आदरणीय ढोस्तने यह सुझाया है कि अग्रेजी भाषा जल्दी ही झुस पदसे हटा दी जाय, बिसयर रहनेका मुझे हक नहीं है। लिखनेवाले दोस्तने यह डर बाहिर किया है कि 'आपके चारवार जिस वादको दोहरानेसे लोग अग्रेजीके साथ साथ अप्रेजेंस मी ९९
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