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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१२८

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और दिखावटी हैं। अगर हममें देशप्रेमको भावना है, तो हमें खुशी ख़ुशी दोनों लिपियाँ सीख लेनी चाहियें। मै आपको शेख अब्दुहा साहबकी मिसाल देता हूँ । आज दोपहरमें ही सुन्होंने मुझे बताया कि काश्मीरकी जेलमें रहकर झुन्होंने आसानीसे हिन्दी भाषा और नागरी लिपि सीख ही हैं । शेख अब्दुला अगर हिन्दी भाषा और नागरी लिपि सीख सके, तो दूसरे राष्ट्रवादी लोग भी जहर, आहूरानी है । 957615 Aco. No. ३८ मेलाल efers are अपना भाषेम, शुख करते हुये आधीजीने कहा कि अब दिन छोटे होते जा रहे हैं, झिसलिये लोगोंको प्रार्थनाका ६ बजे शामका वक्त बहुत देरका मालूम होता है । सिलिये सोमवारसे प्रार्थना ६ बजे शुरू होनेके बजाय साढ़े पाँच बजे शुरू होगी। क्या यह स्वराज है ? आज प्रार्थना में गाये गये भजनका चिक करते हुझे गाधीजीने कहा कि सके साथ दिलको छूनेवाली स्मृतियों जुड़ी हुआ है । भजनावलीके करीब करीब सभी भजनोंके पीछे मेक जितिहास है । जिन भजनोंका समह स्वर्गीय पण्डित खरेने किया था, जो साबरमती आश्रम में रहते थे और अक संगीतज्ञ और भक्त थे । मिस्र काममें काका 1 साहवसे मुन्हें मदद मिली थी। मिस खास गीतको साबरमती आश्रमके मेनेजर स्वर्गीय मगनलाल गाधी अक्सर माया करते थे । से मेरे साथ दक्षिण अफ्रीका में रहे थे और झुन्होने अपना पूरा जीवन देशसेवा के लिये दे दिया था । झुनकी आवाज सुरीली और शरीर मजबूत था । हिन्दुस्तान लौटनेके बाद सुनका शरीर कमजोर हो गया था । जिम्मेदारीका जो धोझ सुनके अपर पका वह स्मितना ज्यादा था कि अकेला आदमी खुसे नहीं सम्हाल सकता था । वामीरी काम और स्वराजका सन्देश करोडों तक पहुँचाना कोभी मामूली बात नहीं थी । बजे करुण स्वरमे वे जिस भजनको