गाया करते थे। जिसमें कविने भगवानको प्रत्यक्ष न देस मस्नेपर निराधा प्रकट की है। उसके जिन्तजारकी रात भेक युग जैसी मालूम होती है । मगनलालका भगवान स्वरानका सपना सच होने, यानी रामराज कायन होनेमे था । यह अपना बहुत दूर जान पड़ता था । वह सिर्फ तामीरी कामके जरिये ही सच्चा बनाया जा सकता था। अगर अनला सके सामने रखे हुये तामीरी प्रोधामको पूरा करती, तो झुसे आपसी लामी और खूनखरानीके वे दृश्य नहीं देखने पस्ते, जो वह आज देख रही है। कहा जाता है कि पिछली १५ अगस्तको में स्वराज मिल गया है। मगर मै झुसे स्वराज नहीं कह सकता । स्वराजमें अक भाभी दूसरे भाभीका गला नहीं काटता | आजाद हिन्दुस्तान सबके साथ दोस्त बनकर रहना चाहता है । यह सारी दुनियामें किसीको अपना दुश्मन नहीं मानना चाहता । मगर हाय 1 भाग खुसीके लड़के, भेक तरफ हिन्दू और सिक्ख और दूसरी तरफ शुमान, भेक दूसरेके सुनके प्यासे हो रहे हैं । यह सब मैंने आपको यह बतानेके लिये कहा है कि अगर आप सच्चे स्वराजके अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं, तो स्वर्गीय भगनलालकी तरह आपको लगातार खुसके लिये सुत्क रहना पड़ेगा 1 भगवानका को आकार नहीं है । मिन्सान उसकी कल्पना कभी आकारोंमें करता है । अगर आप भगवानको रामराजको शम्लने देखना चाहते हैं, तो खुसके लिये पहली जरुरत है आत्मनिरीक्षणकी या खुदके दिलकी जाँच करनेकी । आपको अपने दोषोंको हजार गुले बनाकर देखना होगा और अपने पड़ोसियोंके दोषोंकी तरफसे अपनी आंखें फेर हेनी होगी | सच्ची प्रगतिका यह अकमात्र रास्ता है । बाज आप गिर गये हैं । मुसलमान, हिन्दुओं और सिक्खोंको अपने दुश्मन समझते हैं, और हिन्दू, और सिक्ख, मुसलमानोंको । वे भेक दूसरेके धर्मकी बिलकुल भिज्जत नहीं करते । मन्दिरोंको बरबाद करके सुन्दै मसजिदें बना डाला गया है और मसजिदोंको बरबाद करके सुन्दे मन्दिरोंमें बदल दिया गया है। यह हात दिल दुखानेवाली है। जिससे दोनों धर्मोके नाशके सिवा और कुछ नहीं हो सकता । १०२
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