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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१३०

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अकमात्र रास्ता मगर आपसी की मिन लपटोंको कैसे बुझाया जाय ? मैंने आपको अकमात्र रास्ता बतला दिया है । वह यह है कि दूसरे कुछ भी करें, फिर भी आपको अपना बरताव ठीक रखना होगा । पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिक्सोको बो तकलीफें सहनी पढ रही हूँ, न्हें मे जानता हूँ । मगर यह जानकर भी मै सुन्हें अनदेखा करना चाहता हूँ । यदि जैसा न करूँ, तो मैं पागल हो जाएँ । तत्र मे हिन्दुस्तानकी सेदा भी न कर सकूँ । आप लोग हिन्दुस्तानके मुसलमानोंको अपने सगे भाभी समने । कहा जाता है कि दिल्लीमें शान्ति है। मगर जिससे मुझे जरा भी सन्तोष नहीं है। यह शान्ति फौज और पुलिसकी यज्ञहते हैं । हिन्दुओं और मुसलमानोंके बीच प्यार बिल्कुछ नहीं रहा । सुनके दिल अभी भी ओक दूसरेसे खिने हुये हैं। मैं नहीं जानता कि मिस समाने कोश्री मुस्लिम भाभी भी है या नहीं। अगर हो, तो पता नहीं यहाँपर वह दूसरों-जैसी ही बेफिकरी अनुभव करता है या नहीं । परसों शेख अब्दुल्ला साहब और कुछ मुसलमान भाभी प्रार्थनासभा हाजिर थे । कियभी साहबके मामीकी विधवा पत्नी मी आभी थीं। झुनके पतिका बिना किसी अपराधके मसूरीनें खून कर दिया गया। मै मंजूर करता हूँ कि जिन लोगों यहाँ आनेले नै बेचैन या । मिसवि नहीं कि मुझे सुनपर हमला होनेका डर था, क्योंकि मे मानता हूँ कि मेरी हाजिरीमें कोओ झुन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता या मगर मिस जातका मुझे पूरा भरोसा नहीं था कि सुन्ह, मेरी हाजिरी में अपमानित नहीं किया जा सकता। अगर किसी भी तरह सुनका अपमान किया जाता, तो मेरा सिर धरमसे झुक जाता । मुसलमान भाभियोंके बारेमें जिस तरहका डर क्यों होना चाहिये ! तुन्हें आपके बीचमें वैसी ही सलामती अनुभव करनी चाहिये, जैसी आप खुद करते हैं। यह तब तक नहीं हो सकता, जब तक आप अपने दोषोंको are और अपने पडोसियोक दोषोंको छोटा करके न देखें। आज सारी आँखें हिन्दुस्तानपर कभी हुभी हैं, जो सिर्फ भेशिया और अमीकाकी ही नहीं, बल्कि सारी दुनियाकी आसा बना हुआ है | अगर १०३