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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१३५

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देना चाहता हूँ वह यह है कि कोभी भी मंत्रो अपने प्यारेसे प्यारे आदमीके लिये भी न्यायके रास्तेमें दस्तन्दाजी नहीं कर सकता । असा करनेका से कोभी हक नहीं है । लोकशाहीका काम है कि वह न्यायको सस्ता बनावे और जैसा भिन्तजाम करे कि वह लोगोंको जल्दी मिल नाच । मुसे लोगोंको यह भी गारण्टी देनी होगी कि शासन प्रवन्धमें हर तरहकी आमानदारी और पवित्रताका ध्यान रखा जायगा । लेकिन मंत्रियोंका न्यायकी अदालतोंपर असर डालने या झुनकी जगह खुद के की हिम्मत करना लोकशाही और कानूनका गला घोंटना है । भेक दोस्तने मुझे घेतावनी दी है कि आपके भाषण रेडियो द्वारा लोगोंको सुनाये जाते हैं, जिसलिये आपको बाहर १५ मिनटसे ज्यादा नहीं बोलना चाहिये । मैं अिल चेतावनीची कदर करता हूँ। मिसाल मैंने जितने हो समयमें अपनी बात काटछाँटकर कह दी है और भागे भी जैसा ही करनेकी आशा रखता है । ४१ 27-10-'18 प्रार्थनाके वादके अपने भाषण में गाधीजीने कहा, मुझे अमी मी कम्बल और कम्बल खरीदनेके लिये पैसे मिल रहे हैं। जिस खुदारतासे यह दान दिया जा रहा है, ससे मुझे खुशी होती है । अक अर्दू अखवारका हिस्सा भाज तीसरे पहर मेक दोस्तने मुझे भेक शुर्दू दैनिक्का क हिस्सा पढ़कर सुनाया । में झुर्दू अखबार बहुत ही कम पड़ता हूँ । मै सुई जानता तो हूँ, लेकिन काफी आसानीसे नहीं पढ़ सकता | दोस्त लोग समय समयपर सुई अखवारोंके हिस्से मुझे पढकर सुनाया करते हैं । आज मुझे जो हिस्सा पढकर सुनाया गया था, सुसमें सम्पादने दूसरी भड़कानेवाली वार्तामि यह भी कहा है कि हिन्दुओंने मुसलमानों को हिन्दुस्तानी से निकालने पक्का मिरादा कर लिया है। या तो Z