जेल सुगत चुका हूँ । હ્રદ दिल्लीके कैदी २५-१०-४० आज मानकी प्रार्थना दिल्ली सेंट्रल जेलने कैदियोंके लिये, सुनकी हाजिरीने हुली । कुल ३००० कैदी हाजिर ये । प्रार्थनाके बाठ गाधीजीने कहा कि जब मुझे कैदियोंके बीच प्रार्थनाचमा रखनेश आनंत्रण मिला, तो मुझे की खुशी हुआ । मैं ट पहले ओ बार कैरी रह चुका हूँ। मैं दक्खिन अर्मा और हिन्दुस्तान में भटग अलग कधियों तक दक्षिण अफ्रीकार्ने हिन्दुस्तानी थे, जिन्हें कुली बया जाता था, हब्शी थे और तीसरी क्लास यूरोपियनोंकी थी । जेलॉन जिन तीनोंको अलग अलग रखा जाता था । वव तलावही कैदी जेलने बहने लगे तब हरियों और हिन्दुस्तानियों ने ही कम्पाण्ड रखा गया | वेलके कायदे बहुत कड़े थे। दिवाली और गैरतियाती कैदिलाने कोळी फर्क नहीं किया जाता था। वे सब न हो किनके अपराधी माने जाते थे । भेक तरहले यह ठीक भी है। जो लोग कानून तोते हैं वे सब सुनके खिलाफ अपराध करते हैं । ये क्लासे नहीं चाहिये हिन्दुस्तानने आवादीकी लड़ामी बहुत चरस्त हुनी और सूचेचे ऊंचे दरले लोगोंने मुझमें हिस्सा लिया | नतीजा यह हुआ कि सिर्फ चियासी और गैरतिवादी कटियोन ही फर्क नहीं किया गया, बल्कि बी० और ही रखे गये। वे दरजोनें मैं यह भी जानता हूँ कि तभी बड़े या छोटे विवाची दोन मी मे मेरा विश्वास नहीं है । लोग अपराध करते हैं। कुछ पकड़े बाहर जेल भेज दिये जाते हैं और दूसरे चालाको सुते वा वाते हैं। हिन्दुस्तानी जेलके वडे जेलरने मुझसे कहा था कि मेरो देखरेखमें रहनेवाले कैदियों ने अपने 175
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