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पृष्ठ:Gandhi - Delhi Diary (Hindi).pdf/१५४

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हम लोग भूल जायेंगे कि हिन्दू, मुसलमान और सिक्ख कभी आपस में दुश्मन थे । तब हम महसूस करेंगे कि सभी मुसलमान, हिन्दू और सिक्ख चुरे और राक्षसी स्वभावके नहीं हैं। सभी धर्मों और जातियोंमें कुछ अच्छे मर्द और औरतें हैं । बेशक, भगर खुद बागियोंकी फौज समझदार बन जाय और यह पागलपनका काम बन्द कर दे, तो मुझे ताज्जुच नहीं होगा । आपको अभी गाये गये भजनकी टेक याद होगी, जिसमें कहा गया है कि 'हम चाहे जिस नामसे भगवानकी पूजा करें, हम सब खुसीके वन्दे हैं और झुसीने हम सबको पैदा किया अहिंसाका काम ३०-१०-१४७ और अन्होंने जिसपर जोर चाहिये । गाधीजीने पहले बह असा कोभी अंतराज सुठता करूँगा और न प्रार्थनाके 1 आज भी हमेशा की तरह प्रार्थना शुरू होनेसे पहले लोगोसे पूछा गया कि क्या प्रार्थनामें कुरानकी आयतें पढनेपर किसीको अंतराज है ? भिसपर ओक भाभी खडे हुये दिया कि आयतें नहीं पड़ी जानी साफ साफ बतला दिया या कि अगर है, तो न मे सार्वजनिक प्रार्थना बाद सामयिक घटनाओं पर भाषण दूँगा । अिवलिये भेजा अंतरान झुठनेपर गाधीजीने कहला भेजा कि आम न प्रार्थना होगी और न लोगोंके सामने भाषण होमा 1 मगर लोग गाधीजीको देने वगैर जानेके लिये तैयार नहीं थे। मिसलिये गाधीजी सभामंचपर पहुँचे और थोडे शब्दोंमें सुन्होंने लोगोंको बतलाया कि इन्होंने प्रार्थना क्यों नहीं की और सुनकी समझमें अहिंसाका काम क्या है । सुन्होंने कहा कि किसीका प्रार्थनाके बारेमे अंतराज करना अनुचित है । और खासकर जब वद किसी सार्वजनिक जगहपर न होकर भेक व्यक्तिके निजी अहातेम हो रही हो, तब वो बिलकुल ही अनुचित है । अब बहुत बड़ी तादाद में १२७